– जनता के मन से उतरे, पुराने चेहरों पर तीव्र नाराजगी
नागपुर :- 15 जनवरी को होने वाले नागपुर मनपा चुनाव में मतदाता विभिन्न राजनीतिक दलों के दिग्गज उम्मीदवारों को इस बार सबक सिखाएंगे. उन्हें दोबारा चुनाव लडऩे का लालच महंगा पड़ सकता है. इस बार विभिन्न दलों के कई दिग्गज उम्मीदवार मनपा चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. ये तथाकथित दिग्गज उम्मीदवार जनता केमना से उतरे हैं. इन दिग्गजों के बारे में जनता की राय अब अच्छी नहीं रही. इस बार जनता अपनी पसंद के उम्मीदवार को ही वोट देगी. हालांकि, चूंकि दिग्गज उम्मीदवारों को मतदान नहीं करेंगे, इसलिए उन्हें इस बार बड़ा झटका लगेगा.
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, भाजपा ने अपने उम्मीदवारों का चयन बहुत सोच-समझकर किया होगा. हालांकि, अगर उसके कुछ उम्मीदवार मुंह के बल गिरने की नौबत आयी तो आश्चर्य नही होगा. कांग्रेस केकुछ दिग्गज उम्मीदवारों के साथ भी ऐसा ही होने की संभावना है. चूंकि आम नागरिकहर चुनाव में वही पुराने चेहरे देखता है, इसलिए यह माना जा रहा है कि चुनाव के जरिए इन दिग्गज नेताओं को बाहर करने की कोशिश की जाएगी.
मनपा चुनाव के लिए मतदान में केवल कुछ ही दिन शेष हैं. सभी राजनीतिक दलों ने इस चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं.
मतदान प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. नामांकन पत्रों की जांच के बाद कई उम्मीदवारों ने अपना नाम वापस ले लिया है. इससे चुनाव की स्थिति अब स्पष्ट हो गई है. 151 सीटों के लिए 9०2 उम्मीदवार मैदान में हैं और प्रमुख राजनीतिक दलों के कई दिग्गज नेता तीसरी या चौथी बार चुनाव लड़ रहे हैं. वे एक बार फिर अपनी किस्मत आजमाना चाहते हैं. इन उम्मीदवारों के खिलाफ जनता का गुस्सा बढ़ता जा रहा है. मतदाताओं के अनुसार, मनपा चुनावों में नए और युवा उम्मीदवारों को मौका देने के बजाय, राजनीतिक दलों ने पुराने चेहरों को मैदान में उतारा है. कई युवा उम्मीदवार पार्टी के प्रति निष्ठा से काम कर रहे हैं. राजनीतिक नेतृत्व ने उनकी अनदेखी की है.
भाजपा और कांग्रेस के साथ-साथ अन्य राजनीतिक दलों ने भी चुनाव में अनुभवी नेताओं को मैदान में उतारा है. पार्टी नेतृत्व ने जनता के बीच उनकी प्रतिष्ठा पर जरा भी ध्यान नहीं दिया है. राजनीतिक दलों के नेताओं ने समाज में उम्मीदवारों की पहचान को भी नजरअंदाज कर दिया है. नागपुर में कई वर्षों बाद मनपा चुनाव हो रहा हैं. लंबे अंतराल के कारण, दिग्गज उम्मीदवारों के प्रति जनता के मन में असंतोष का माहौल बन गया है. जब मनपा प्रशासक के अधीन थी, तब जनता की समस्याओं को सुलझाने के लिए कोई आगे नहीं आया. लेकिन अब, चुनाव नजदीक आने के साथ ही, यही दिग्गज पार्षद मतदाताओं के दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं. वे वोट मांगने के लिए लोगों से संपर्क कर रहे हैं. कोरोना काल में इन्हीं उम्मीदवारों को जनता की कोई चिंता नहीं थी. कई मायनों में जनता का इन दिग्गज नेताओं के साथ अच्छा खासा अनुभव रहा है. परिणामस्वरूप, इन अनुभवी उम्मीदवारों को सबक मिल गया है.
जनता ने उन्हें सबक सिखाने का फैसला कर लिया है. कुछ बड़े-बड़े उम्मीदवारों ने धन के बल पर चुनाव जीतने की पूरी तैयारी कर ली है. जनता खुद ऐसे उम्मीदवारों को सबक सिखाएगी.
आपराधिक रिकॉर्ड वाले उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में
अगर जनता उन अनुभवी उम्मीदवारों का समर्थन नहीं करती, जो धन और शक्ति के बल पर चुनाव जीतने का भ्रम पाल रहे हैं, तो उन्हें इस बार घर बैठे ही रहना पड़ेगा. राजनीतिक दलों ने आपराधिक रिकॉर्ड वाले उम्मीदवारों को भी चुनाव मैदान में उतारा है. इसी वजह से युवाओं को यह एहसास हो चुका है कि राजनीतिक माहौल दूषित हो गया है. राजनीतिक दलों ने पहले यह भी कहा था कि चुनावों में युवा पीढ़ी के उम्मीदवारों को अधिक अवसर दिए जाएंगे. हालांकि, मनपा चुनाव की घोषणा होते ही राजनीतिकदल मतदाताओं पर आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने अंतत: अपने फैसले खुद लिए हैं और अपनी पसंद के अनुसार उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है.




