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गरीबों के हिस्से का अनाज लूटने का खेल, ‘अंत्योदय’ योजना में खुला भ्रष्टाचार का जाल

– राशन वितरण में दलालों की घुसपैठ, गरीबों का निवाला बना अफ़सरों की कमाई का ज़रिया

– नागपुर की 650 राशन दुकानों में गड़बड़ी  ज़रूरतमंदों को नहीं मिल रहा पूरा अनाज

नागपुर :- सरकार गरीबों को भूखा न रहने देने और उनका पेट भरने के लिए ‘अंत्योदय समग्र प्रधान’ योजना के तहत राशन वितरित करती है। लेकिन, इसके वितरण के लिए ज़िम्मेदार भ्रष्ट व्यवस्था ही गरीबों के हक का खाना छीन रही है। यह बात सामने आई है कि इस कल्याणकारी योजना को दलालों के ज़रिए लूटा जा रहा है और अपना पेट भरने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

चाय से लेकर चीनी और नमक-मिर्च से लेकर अनाज तक, रोज़मर्रा की ज़िंदगी के लिए ज़रूरी हर चीज़ की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। नतीजतन, मेहनतकश लोग सचमुच महंगाई की आग में जल रहे हैं। सरकार उनके जीवन को थोड़ा और सहने योग्य बनाने के लिए कई तरह की योजनाएँ लागू करती है। ऐसी ही एक योजना है प्रधान और अंत्योदय योजना। इस योजना के ज़रिए बेसहारा, बुज़ुर्ग और गरीब लोगों को सस्ते गल्ले की दुकानों के ज़रिए राशन मुहैया कराया जाता है। प्राथमिकता योजना के तहत, कार्डधारकों को प्रति व्यक्ति 5 किलो अनाज (1 किलो गेहूँ और 4 किलो चावल) दिया जाता है। बेशक, अगर पाँच लोगों का परिवार है, तो एक परिवार को हर महीने 25 किलो अनाज मिलता है। अंत्योदय योजना के तहत, प्रत्येक परिवार को 35 किलो (10 किलो गेहूँ और 25 किलो चावल) अनाज दिया जाता है। हालाँकि, 30 प्रतिशत ईमानदार राशन दुकानदारों को छोड़कर, बाकी दुकानों से गरीबों को कभी भी पूरा राशन नहीं मिलता।

प्रासंगिक सूत्रों के अनुसार, नागपुर शहर में प्राथमिकता योजना के 3,79,229 और अंत्योदय योजना के 46,166 कार्डधारक हैं। इन सभी को पूरा राशन मिले और सार्वजनिक खाद्यान्न वितरण प्रणाली सुचारू रूप से चले, इसके लिए सरकार ने हर शहर के लिए इसे आसान बना दिया है। नागपुर में छह ज़ोन हैं, अर्थात् धंतोली, मेडिकल, महल, इतवारी, सदर और टेका, और इनमें 650 से ज़्यादा राशन दुकानदार हैं।

खाद्य आपूर्ति विभाग के भ्रष्ट अफ़सरों पर उठे सवाल

गरीब और बेसहारा राशन कार्डधारकों को अनाज वितरित करने की ज़िम्मेदारी शहर के राशन दुकानदारों की होती है। इसके लिए उन्हें आर्थिक मुआवज़ा भी मिलता है। इन सब पर नज़र रखने की ज़िम्मेदारी खाद्य आपूर्ति विभाग की है। लेकिन इसी विभाग के कुछ भ्रष्ट लोग ज़री के शुक्राचार्य बन बैठे हैं। चर्चा है कि इन अधिकारियों और कर्मचारियों ने कुछ राशन दुकानदारों को अपने चंगुल में फँसाकर गरीबों के मुँह और हाथों से निवाला छीन लिया है।


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