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शीतकालीन सत्र: विधानसभा में 75,286 करोड़ रुपये की अनुपूरक मांग पेश, सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित

<p><strong>नागपुर &colon;-<&sol;strong> आज से उप-राजधानी नागपुर में विधानमंडल का शीतकालीन सत्र शुरू होने वाला है। हालाँकि&comma; इस वर्ष विधानसभा और विधान परिषद दोनों की कार्यवाही विपक्ष के नेता के बिना ही चलेगी। यह स्थिति इसलिए पैदा हुई है क्योंकि विपक्ष के पास संख्या बल नहीं है। विपक्ष के नेता के बिना भी&comma; सत्र में किसानों की व्यापक कर्जमाफी&comma; राज्य में बढ़ते अपराध&comma; महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार और युवाओं के लिए रोजगार की कमी जैसे मुद्दे छाए रहने की संभावना है।<&sol;p>&NewLine;<p>सत्र के पहले दिन आज दोनों सदनों में अनुपूरक माँगें पेश की जाएँगी। उसके बाद&comma; सरकारी कामकाज समाप्त होने पर शोक प्रस्ताव पेश किया जाएगा और कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी जाएगी। इस समय राज्य में स्थानीय निकाय चुनावों की हवा चल रही है। ऐसे में&comma; क्या इन चुनावों का असर अनुपूरक माँगों पर दिखेगा और क्या सरकार जनता को खुश करने के लिए कोई नई घोषणाएँ करेगी&quest; यह देखना महत्वपूर्ण होगा।<&sol;p>&NewLine;<p><strong>नाना पटोले की सत्र अवधि बढ़ाने की मांग को अध्यक्ष ने खारिज कर दिया।<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;<p>चूँकि नागपुर में सत्र विदर्भ के लिए है&comma; इसलिए इसे विदर्भ समझौते के अनुसार ही आयोजित किया जाना चाहिए। आज कुछ अनुपूरक माँगें प्रस्तुत की जाएँगी&comma; लेकिन अन्य अनुपूरक माँगें और विधेयक भी हैं। सरकार सत्र को जल्दी समाप्त करने की इतनी जल्दी में क्यों है&quest; कांग्रेस नेता और विधायक नाना पटोले ने इस पर सवाल उठाया और सत्र की अवधि बढ़ाने की माँग की। हालाँकि&comma; विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने इस माँग को अस्वीकार कर दिया।<&sol;p>&NewLine;<p><strong>विपक्ष का नेता नियुक्त करने में क्या दिक्कत है&quest; वडेट्टीवार ने सरकार से पूछा सवाल<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;<p>1980 में जब 14 विधायक थे और 1985 में जब 16 विधायक थे&comma; तब उन्हें विपक्ष का नेता बनाया गया था। लेकिन वर्तमान में&comma; चूँकि सरकार का भाग्य ठीक नहीं है&comma; इसलिए मैं इस बारे में कुछ नहीं कह सकता। वे संवैधानिक पदों को खाली रखकर सरकार चला रहे हैं। यह मनमाना शासन है। अगर हमने नाम दिया है&comma; तो आपको विपक्ष का नेता नियुक्त करने में क्या हर्ज है&quest; कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने सरकार से पूछा। अगर सत्ताधारी दल लोकतंत्र के आधार पर सरकार नहीं चलाना चाहता&comma; तो इसका मतलब है कि वे संविधान और लोकतंत्र को स्वीकार नहीं करते। स्पीकर राम शिंदे ने कहा था कि आज़ादी के बाद के कुछ रीति-रिवाज़ों और परंपराओं का पालन करने की ज़रूरत नहीं है। वडेट्टीवार ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी। ये रीति-रिवाज़ या परंपराएँ नहीं हैं&comma; यह एक संवैधानिक पद है। स्पीकर की कुर्सी पर बैठकर इस तरह के बयान देना ग़लत है। संवैधानिक पद पर रहते हुए कुछ असंवैधानिक करने का मतलब है कि आपको नियमों के मुताबिक़ काम नहीं करना है। सरकार डेढ़ साल से सत्ता में है। क्या इतने लंबे समय तक विपक्ष का नेता न होना सरकार के लिए सम्मान की बात है&quest; इस पर विचार करके फ़ैसला लिया जाना चाहिए&comma; विजय वडेट्टीवार ने कहा।<&sol;p>&NewLine;<p><strong>मुझे नहीं लगता कि भास्कर जाधव विपक्ष के नेता बनेंगे &&num;8211&semi; सामंत<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;<p>भास्कर जाधव एक आक्रामक नेता हैं। उन्हें विधानसभा और विधान परिषद में व्यापक अनुभव है। ऐसे आक्रामक नेता को खुश करने के लिए ठाकरे गुट ने उन्हें सिर्फ़ एक पत्र भेजकर विपक्ष का नेता बनने के लिए कहा है। लेकिन जब असली समय आएगा&comma; तो मुझे नहीं लगता कि वह ऐसा करेंगे&comma; ठाकरे गुट के नेता और मंत्री उदय सामंत ने कहा। भास्कर जाधव ने इस पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा&comma; &&num;8220&semi;समय आने पर बाद में देखेंगे कि मैं लूँगा या नहीं। लेकिन सरकार को पहले अपना काम करना चाहिए। उसे विपक्ष के नेता पद के चयन के लिए एक कार्यक्रम आयोजित करना चाहिए। इसलिए&comma; उद्धव ठाकरे मेरा नाम लेंगे या किसी और का&comma; यह हमारा आंतरिक मामला है। हम उस समय इस पर टिप्पणी करेंगे।&&num;8221&semi;<&sol;p>&NewLine;<p><strong>विधान सभा में सरकारी विधेयक पेश किया गया<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;<p>&lpar;1&rpar; विधान सभा विधेयक संख्या 89 वर्ष 2025 &&num;8211&semi; महाराष्ट्र दुकानें और प्रतिष्ठान &lpar;रोजगार और सेवा की शर्तों का विनियमन&rpar; &lpar;संशोधन&rpar; विधेयक&comma; 2025<&sol;p>&NewLine;<p>&lpar;2&rpar; विधान सभा विधेयक संख्या 92&sol;2025 महाराष्ट्र लोक न्यास &lpar;द्वितीय संशोधन&rpar; विधेयक&comma; 2025<&sol;p>&NewLine;<p>&lpar;3&rpar; विधान सभा विधेयक संख्या 93 वर्ष 2025 &&num;8211&semi; महाराष्ट्र कृषि उपज विपणन &lpar;विकास और विनियमन&rpar; &lpar;संशोधन&rpar; विधेयक&comma; 2025<&sol;p>&NewLine;<p>&lpar;4&rpar; विधान सभा विधेयक संख्या 94 वर्ष 2025 &&num;8211&semi; महाराष्ट्र &lpar;भूमि विखंडन निवारण और उसका चकबंदी&rpar; &lpar;संशोधन&rpar; विधेयक&comma; 2025<&sol;p>&NewLine;<p>&lpar;5&rpar; विधान सभा विधेयक संख्या 95&comma; 2025 महाराष्ट्र लोक न्यास &lpar;तृतीय संशोधन&rpar; विधेयक&comma; 2025<&sol;p>&NewLine;<p>&lpar;6&rpar; विधान सभा विधेयक संख्या 96 वर्ष 2025 &&num;8211&semi; महाराष्ट्र जन विश्वास &lpar;प्रावधानों में संशोधन&rpar; विधेयक&comma; 2025<&sol;p>&NewLine;<p>&lpar;7&rpar; विधान सभा विधेयक संख्या 97 वर्ष 2025 &&num;8211&semi; महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता &lpar;द्वितीय संशोधन&rpar; विधेयक&comma; 2025<&sol;p>&NewLine;<p><strong>शोक सभा के प्रस्ताव के बाद विधानसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;<p>शिवाजीराव भानुदास कर्डिले&comma; विधान सभा सदस्य एवं पूर्व राज्य मंत्री&comma; महादेवराव सुकाजी शिवणकर&comma; भरत राजाभाऊ बोंद्रे&comma; विधान सभा सदस्य एवं पूर्व मंत्री श्याम उर्फ जनार्दन बालकृष्ण अष्टेकर&comma; विधान सभा सदस्य एवं पूर्व राज्य मंत्री यशवंत बाबाजी दलवी&comma; नारायण नानू पटेल&comma; सिद्रामप्पा मलकप्पा पाटिल&comma; गिल्बर्ट जॉन मेंडोंसा&comma; राजीव अनिल देशमुख&comma; विधान सभा की पूर्व सदस्य निर्मला शंकरराव थोकल के दुखद निधन पर शोक प्रस्ताव पेश किया गया। इसके बाद सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।<&sol;p>&NewLine;<p><strong>विधान परिषद अध्यक्ष तालिका नामांकन<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;<p>विधान परिषद के सभापति राम शिंदे ने सदस्यों अमित गोरखे&comma; कृपाल तुमाने&comma; अमोल मिटकारी&comma; गिराज लिंगाडे और सुनील शिंदे को सभापति की सूची में नामित किया।<&sol;p>&NewLine;