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रेत माफियाओं से 1.34 करोड़ की जब्ती

नागपुर :- प्रवर्तन निदेशालय (ईडी नागपुर उप-क्षेत्रीय कार्यालय) द्वारा धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के तहत महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के विभिन्न ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई की गई थी. रेत माफियाओं द्वारा किए जा रहे अवैध खनन का पर्दाफाश किया गया था. इस कार्रवाई में विभाग को बड़ी सफलता हाथ लगी है. लगभग 1.34 करोड़ रुपये की चल संपत्ति (बैंक बैलेंस) को फ्रीज कर दिया गया है. इसी प्रकार करोड़ों रुपये की अचल संपत्ति का भी पता लगाया गया. विभाग को अनुमान है कि कारोबारियों ने लगभग 30 करोड़ की कमाई इससे की. विभाग ने बताया कि विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज, संपत्ति के कागजात और डिजिटल उपकरण बरामद और जब्त किए गए हैं. नागपुर और भंडारा (महाराष्ट्र) के रेत घाटों से होने वाले अवैध रेत खनन को इस कार्रवाई में टार्गेट किया गया था. मध्य प्रदेश के भोपाल, होशंगाबाद और बैतूल जिले तथा महाराष्ट्र के नागपुर और भंडारा जिलों में स्थित 16 परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया गया गया था.

विभाग ने बताया कि नागपुर में रेत खनन बंद होने का लाभ ये लोग उठा रहे थे. ट्रांसपोर्टरों से गठजोड़ कर मध्य प्रदेश से जाली ट्रांजिट परमिट पर रेत नागपुर लायी जा रही थी. इससे जहां उनकी अवैध रूप से कमाई हो रही थी वहीं सरकार के राजस्व को बड़े पैमाने पर चुना लग रहा था. सर्च के दौरान मिले कागजातों से यह स्पष्ट भी हो रहा है. जांच में पता चला कि इलेक्ट्रानिक ट्रांजिट परमिट (ईटीपी) नागपुर के आपरेटरों को 6000 से 10,000 रुपये में भेजा जाता था. इस जाली ईटीपी के सहारे रेत नागपुर लायी जाती थी और बेची जाती थी. सबसे बड़ी बात यह है कि मध्य प्रदेश के अवैध घाटों से इसका उत्खनन किया जाता था और सरकारी रिकॉर्ड में दिखाया जाता था कि रेत को अधिकृत रेत घाट से लोड किया गया है. यह मामला सदर और अंबाझरी थाने में नरेंद्र पिंपले, अमोल गुड्डू खोब्रागडे एवं अन्य के खिलाफ दायर कियी गया था. इसी के आधार पर ईडी ने कार्रवाई की.

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