– हाई कोर्ट सख्त, प्रशासन की ढिलाई पर फटकार
– लाउडस्पीकर पर लगाम : अब नियम तोड़े तो सीधी कार्रवाई तय
नागपुर :- सिविल लाइंस क्षेत्रों में लॉन्स और विवाह समारोह स्थलों पर वायु और ध्वनि प्रदूषण को लेकर जहां हाई कोर्ट ने स्वयं संज्ञान लिया वहीं इसे लेकर जनहित याचिकाएं भी दायर की गई. ऐसे मामलों को लेकर दायर 3 याचिकाओं पर हाई कोर्ट ने एक साथ सुनवाई की. सुनवाई के दौरान न्यायाधीश अनिल पानसरे और न्यायाधीश निवेदिता मेहता ने प्रशासन की ढिलाई पर कड़ी नाराजगी जताई. कोर्ट ने कहा कि विशेष रूप से शहर के वीआईपी क्षेत्र ‘सिविल लाइंस’ में चल रहे 13 विवाह लॉन्स और क्लबों में से महानगरपालिका को केवल 3 (सीपी क्लब, गोंडवाना क्लब और लेडीज क्लब) की अनुमति के बारे में जानकारी है, जबकि स्वागत लॉन्स सहित शेष 10 के बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं है. कोर्ट ने शहर में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण, वायु प्रदूषण और इसे रोकने में प्रशासन की विफलता पर बेहद सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कानून लागू करने की इच्छाशक्ति की पूरी तरह से कमी नजर आ रही है.
कोर्ट ने पुलिस प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई को असंतोषजनक बताया. कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और ध्वनि प्रदूषण से जुड़े गंभीर मामले की जांच के लिए केवल एक सहायक पुलिस निरीक्षक को नियुक्त किया गया. साथ ही पुलिस द्वारा ध्वनि प्रदूषण के मामलों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 168 और आईपीसी की धारा 188 के तहत की जा रही कार्रवाई की प्रासंगिकता पर भी सवाल उठाए गए. सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि पटाखों और लाउडस्पीकर के शोर से पक्षी अपने घोंसले छोड़कर शहरों से गायब हो रहे हैं. अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो इसकी जिम्मेदारी अधिकारियों को सौंपी जाएगी.
नया आवेदन और शपथपत्र : अब लॉन, क्लब और मैरिज हॉल मालिकों, साउंड सिस्टम संचालकों और इवेंट मैनेजरों को नये सिरे से आवेदन करना होगा और एक शपथपत्र देना होगा कि वे निर्धारित डेसिबल सीमा का उल्लंघन नहीं करेंगे.
डेसिबल की सीमा : आवासीय क्षेत्रों में सुबह 6 से रात 10 बजे के बीच शोर की सीमा 55 डेसिबल और साइलेंट जोन में 50 डेसिबल से अधिक नहीं होनी चाहिए. रात 10 से सुबह 6 बजे के बीच साउंड सिस्टम के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा.
साउंड सिस्टम की ऊंचाई : लाउडस्पीकर जमीन से 15 फीट से अधिक ऊंचाई पर नहीं लगाए जा सकेंगे और उनका रुख कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों की ओर होना चाहिए, न कि बाहर की तरफ.
जागरूकता बोर्ड : सभी विवाह स्थलों पर ध्वनि और वायु प्रदूषण के दुष्प्रभावों को प्रदर्शित करने वाले बोर्ड अनिवार्य रूप से लगाने होंगे.
‘पॉल्यूशन फ्री सिटी’ पोर्टल : राज्य सरकार को एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू करने का निर्देश दिया गया है जहां नागरिक ध्वनि प्रदूषण की शिकायत दर्ज कर सकेंगे. इस पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी सार्वजनिक करनी होगी.