– प्रशासनिक और सुपरविजन की कमी बना मौत का कारण
कोटा :- कोटा न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मई माह में हुई पांच प्रसूताओं की मौत के मामले में हाई लेवल जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है. रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां सामने आई हैं और मौतों के पीछे इलाज में लापरवाही, संक्रमण नियंत्रण में कमी तथा प्रशासनिक स्तर पर कमजोर निगरानी को जिम्मेदार बताया गया है. इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी कोटा पहुंचे और उन्होंने मामले में सरकार पर सवाल उठाते हुए जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने तथा पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की मांग की.
दिल्ली एम्स के जांच रिपोर्ट के अनुसार, एक प्रसूता शिरीन की बच्चेदानी में पहले से संक्रमण मौजूद था. इसके बावजूद संक्रमण का उपचार करने के बजाय बच्चेदानी में टांके लगा दिए गए. रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे बैक्टीरिया अंदर ही रह गए और मवाद बन गया. बाद में संक्रमण पूरे शरीर में फैल गया, जिसके चलते मल्टी ऑर्गन फेलियर की स्थिति पैदा हुई और महिला की मौत हो गई. शिरीन के पति मोहम्मद आशू ने भी पहले आरोप लगाया था कि एक डॉक्टर ने टांके लगाने की जरूरत नहीं बताई थी, जबकि दूसरी डॉक्टर ने टांके लगा दिए.
कोटा में 5 से 8 मई के बीच सिजेरियन डिलीवरी के बाद पांच प्रसूताओं की मौत हुई थी. मामले की जांच के लिए एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर के विशेषज्ञों की कमेटी गठित की गई थी. कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में प्रशासनिक और सुपरविजन की कमी को भी मौतों के लिए जिम्मेदार माना है. वहीं एम्स की जांच टीम ने ऑपरेशन थिएटर में संक्रमण की आशंका जताई है. रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि घटना से एक दिन पहले 4 मई को एक निजी सेंटर पर कराई गई जांच में शिरीन की बच्चेदानी में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी थी.







