– शीराज़ क़ुरैशी अधिवक्ता, राष्ट्रीय संयोजक – भारत फर्स्ट
भारत की महान धरती विविधताओं का संगम है। यहां नदियाँ, पर्वत, वन, खेत, और उनसे भी बढ़कर सभ्यता और संस्कृति का ऐसा विराट प्रवाह बहता रहा है जिसने पूरी दुनिया को चकित किया है। इस भूमि ने न केवल अनेक धर्मों और विचारधाराओं को जन्म दिया बल्कि उनका पोषण और संरक्षण भी किया। यही कारण है कि भारत को सदा से विश्वगुरु कहा गया, क्योंकि यहां की धरती ने मानवता को सहअस्तित्व, भाईचारा और सत्य की राह दिखाई। इसी महान परंपरा को और सशक्त करने का संकल्प लेकर मुस्लिम राष्ट्रीय मंच द्वारा 27 सितंबर 2025 को नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में अखिल भारतीय मुस्लिम महासम्मेलन आयोजित होने जा रहा है।
यह सम्मेलन न केवल मुस्लिम समाज के लिए बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है क्योंकि यह संकीर्णता और कट्टरता से परे हटकर राष्ट्रवाद, भारतीयता, शिक्षा और तरक्की की दिशा में नए अध्याय की शुरुआत करेगा। पहली बार सभी फिरकों से जुड़े मुसलमान एक मंच पर मिलकर देशहित और राष्ट्रनिर्माण की बात करेंगे। यह भारतीय समाज के इतिहास में एक अनूठा क्षण होगा जब मुसलमान इस्लाम की बुनियादी शिक्षाओं और भारतीय दर्शन के साझा सूत्रों को जोड़ते हुए यह संदेश देंगे कि भारत पहले है और यही हमारी आस्था और पहचान की असली कसौटी है। इस सम्मेलन का मूल आधार तालीम, तहज़ीब और तरक्की है और यह मुस्लिम समाज को भारत की मुख्यधारा में सक्रिय और सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करेगा।
इस ऐतिहासिक महासम्मेलन की प्रेरणा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ प्रचारक और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच और भारत फर्स्ट के मार्गदर्शक आदरणीय इंद्रेश कुमार की दूरदर्शिता और राष्ट्रवादी चिंतन से प्राप्त हुई है। उनकी विचारधारा और नेतृत्व ने सदैव यह स्पष्ट किया है कि भारतीय मुसलमान राष्ट्र की ताक़त हैं और उनका योगदान भारत की एकता, अखंडता और विकास के लिए अनिवार्य है। इंद्रेश का यह संदेश कि “भारत पहले, इंसानियत पहले और तरक्की पहले” आज के समय में मुस्लिम समाज को नई दिशा देने वाला सिद्धांत है। इस सम्मेलन की आत्मा और इसकी दिशा-रेखा उनके ही विचारों से आलोकित है!
क़ुरआन शरीफ़ में अल्लाह तआला फरमाता है कि “क्या जानने वाले और न जानने वाले बराबर हो सकते हैं” (क़ुरआन 39:9)। यह आयत इस बात पर जोर देती है कि इंसान की असली पहचान उसकी इल्मी क्षमता और समझ से होती है। पैग़म्बर ए इस्लाम की पहली वही “इक़रा” यानी “पढ़ो” से शुरू हुई। यही संदेश इस सम्मेलन का भी है कि अगर मुसलमान तरक्की चाहते हैं तो उन्हें सबसे पहले शिक्षा पर ध्यान देना होगा। भारतीय दर्शन भी इसी बात पर जोर देता है कि विद्या मनुष्य को सही मार्ग दिखाती है और अज्ञानता ही सारे दुखों और बुराइयों की जड़ है। उपनिषदों में कहा गया है – “तमसो मा ज्योतिर्गमय” यानी “हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो।” यह प्रकाश केवल विद्या और ज्ञान से ही संभव है।
सम्मेलन का दूसरा आधार तहज़ीब है। इस्लाम हमें इंसानियत, करुणा और भाईचारे की शिक्षा देता है। पैग़म्बर ने फरमाया कि “सबसे अच्छा इंसान वह है जो इंसानों के लिए सबसे ज़्यादा फ़ायदेमंद हो।” यह हदीस हमें याद दिलाती है कि हमारी तहज़ीब का असली पैमाना दूसरों के लिए उपयोगी होना है। भारतीय दर्शन भी इसी आदर्श को दोहराता है। महाभारत में कहा गया है कि “परोपकाराय पुण्याय, पापाय परपीड़नम्” अर्थात पुण्य वही है जिसमें दूसरों का उपकार हो और पाप वही है जिसमें दूसरों को पीड़ा हो। जब मुस्लिम समाज अपनी तहज़ीब को भारतीयता और मानवता से जोड़ेगा तो निश्चित रूप से उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे देश पर पड़ेगा।
तरक्की सम्मेलन का तीसरा मूल स्तंभ है। इस्लाम में तरक्की का सिद्धांत इंसाफ और अमानतदारी के साथ जुड़ा हुआ है। क़ुरआन कहता है कि “अल्लाह उस क़ौम की हालत नहीं बदलता जो खुद अपनी हालत बदलने के लिए तैयार न हो” (क़ुरआन 13:11)। भारतीय दर्शन भी यही कहता है कि कर्म ही भाग्य को बदलता है। गीता में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को उपदेश दिया कि “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन” अर्थात मनुष्य का अधिकार केवल कर्म करने में है, परिणाम की चिंता करने में नहीं। यही विचार मुस्लिम समाज की तरक्की की राह को प्रशस्त करता है और यही इस सम्मेलन का मुख्य संदेश है।
राष्ट्रवाद इस सम्मेलन का केंद्रीय तत्व है। राष्ट्रवाद का अर्थ किसी धर्म विशेष की प्रधानता नहीं बल्कि राष्ट्र की एकता, अखंडता और समृद्धि को सर्वोपरि मानना है। क़ुरआन में कहा गया है “और हमने तुम्हें क़बीलों और जातियों में इसलिए बनाया ताकि तुम एक-दूसरे को पहचान सको” (क़ुरआन 49:13)। इसका अर्थ है कि विविधता कोई अभिशाप नहीं बल्कि एक अवसर है जिससे इंसानियत को मजबूत किया जा सकता है। भारतीय संस्कृति का मंत्र भी यही है – “वसुधैव कुटुम्बकम्” अर्थात पूरी पृथ्वी एक परिवार है।
यह सम्मेलन इस बात का जीवंत मिसाल बनेगा कि भारतीय मुसलमान न केवल भारत के वफादार नागरिक हैं बल्कि वे इस देश की शक्ति और गौरव को बढ़ाने वाले भी हैं। यह सम्मेलन उन युवाओं को प्रेरित करेगा जो आज बेरोज़गारी और कट्टरता की चुनौतियों से जूझ रहे हैं कि वे शिक्षा, हुनर और राष्ट्रवाद की राह अपनाएं। यह सम्मेलन महिलाओं को भी प्रेरित करेगा कि वे शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में आगे आएं।
इस महासम्मेलन का महत्व इस बात में भी निहित है कि यह मुसलमानों के भीतर से एक नई सोच और आत्मविश्वास को जन्म देगा। यह सम्मेलन यह सिद्ध करेगा कि मुसलमान केवल धार्मिक और संकीर्ण मुद्दों तक सीमित नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण और भारतीयता की दिशा में भी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
अंत में यह कहा जा सकता है कि अखिल भारतीय मुस्लिम महासम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं बल्कि एक नई यात्रा की शुरुआत है। यह यात्रा हमें इस दिशा में ले जाएगी जहाँ मुसलमान अपनी दीनी पहचान को भारतीयता और राष्ट्रवाद के साथ जोड़ते हुए भारत के मज़बूत और विकसित भविष्य का निर्माण करेंगे। जैसा कि क़ुरआन शरीफ में कहा गया है कि “अल्लाह उस क़ौम की हालत नहीं बदलता जब तक कि वे खुद अपनी हालत न बदलें।” अब समय आ गया है कि भारतीय मुसलमान खुद अपनी हालत बदलने का बीड़ा उठाएं और भारत को विश्वगुरु बनाने में अपनी पूरी क्षमता के साथ योगदान दें।
इस सम्मेलन की प्रेरणा और मार्गदर्शन देने वाले इंद्रेश कुमार (वरिष्ठ प्रचारक आरएसएस) को हृदय से श्रद्धा और आभार अर्पित है जिनकी दूरदृष्टि, राष्ट्रवादी विचारधारा और अटूट निष्ठा ने इस आंदोलन को जन्म दिया। उनके नेतृत्व में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने सदैव यही बताया है कि मुसलमान भारतीय समाज की आत्मा का अभिन्न हिस्सा हैं और उनका भविष्य भारत के भविष्य से ही जुड़ा हुआ है। यही भावना इस सम्मेलन की आत्मा है और यही भारत फर्स्ट का संदेश है।








