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रेलवे की ‘लाचार’ हेल्पलाइन : हादसे की जगह टीबी अभियान का प्रचार

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– फसरों की चुप्पी पर उठे सवाल — हादसे के वक्त रेलवे प्रशासन नदारद

नागपुर :- छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के पास मंगलवार दोपहर हुए भीषण हादसे की खबर ने हर जगह यात्रियों और परिजनों का दिल दहला दिया है। उनका रोना-धोना जारी है, लेकिन यह साफ हो गया है कि रेल प्रशासन द्वारा जारी हेल्पलाइन पूरी तरह लाचार है। भारतीय रेलवे के हर जोन (डिवीजन) में अधिकारी छोटे-बड़े कामों में व्यस्त हैं। हर बात को बढ़ा-चढ़ाकर बताया जाता है। लेकिन, मुसीबत के समय में ज्यादातर वरिष्ठ रेल अधिकारी जानकारी देने से कतराते हैं। जनसंपर्क अधिकारी निराशा जताते हैं। मंगलवार दोपहर बिलासपुर के पास हुए भीषण हादसे के बाद यह बात फिर से साफ हो गई। हादसे की खबर सुनकर सदमे में आए यात्रियों के परिजन रेलवे द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर पर स्थिति जानने के लिए संपर्क करने लगे। लेकिन रात 9 बजे तक हेल्पलाइन नंबर से कोई जानकारी नहीं मिल पाई।

कोई मदद नहीं मिली। इसलिए, घटनास्थल पर मौजूद दोनों नंबरों पर दुर्घटना की जानकारी लेने के बजाय, रेलवे के 100 दिवसीय टीबी मुक्त जागरूकता अभियान का प्रचार किया जा रहा था। उपस्थित प्रतिनिधि ने इस भयावह घटना के संबंध में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (बिलासपुर ज़ोन) के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. सुष्कर विपुल से रात 9 बजे तक बार-बार संपर्क किया। हालाँकि, उन्होंने भी फ़ोन उठाने की ज़हमत नहीं उठाई।

यात्रियों के परिजन परेशान

कुछ रेलवे कर्मचारी ‘इंतज़ार करो और देखो’ की सलाह दे रहे थे। रात में दक्षिण मध्य रेलवे के मंडल प्रबंधक से संपर्क किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मृतकों या घायलों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चूँकि दुर्घटनास्थल पर चार लाइनें हैं, इसलिए रेलवे परिचालन पर कोई ख़ास असर नहीं पड़ा। संबंधित यात्रियों और परिजनों को हेल्पलाइन के बारे में अवगत कराने के बाद, उन्होंने स्थानीय जनसंपर्क अधिकारी के माध्यम से एक बुलेटिन जारी किया। इसमें जानकारी दी गई कि दुर्घटना के कारण नागपुर होकर चलने वाली कौन-कौन सी ट्रेनें प्रभावित हुईं।