– विकसित भारत जी राम जी’ योजना आई, लेकिन स्टाफ की भूमिका अब भी अनिश्चित
– मनरेगा के बाद क्या? अधिकारी-कर्मचारी असमंजस में, सरकार की चुप्पी पर सवाल
नागपुर :- महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (एमजीएनआरईजीए) को निरस्त करने और उसके स्थान पर ‘विकासित भारत जी राम जी’ योजना लागू करने के लिए संसद में बहुमत से एक विधेयक पारित किया गया है. यह योजना लागू होने के बाद, एमजीएनआरईजीए योजना के अंतर्गत कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों में भविष्य को लेकर चिंता देखी जा रही है.
जिला परिषद स्तर पर, मनरेगा प्रमुख गुट विकास अधिकारी, 2 सहायक कार्यक्रम अधिकारी, 1 सहायक लेखा अधिकारी, 1 जिला कृषि अधिकारी, 1 वरिष्ठ सहायक, 1 कनिष्ठ सहायक और 1 चपरासी के स्टाफ को मंजूरी दी गई है. जिलाधिकारी कार्यालय में, 1 नोडल अधिकारी, 2 सहायक कार्यक्रम अधिकारी, 1 कंप्यूटर ऑपरेटर और 1 सहायक लेखा अधिकारी सहित 6 से 7 स्टाफ सदस्यों को मंजूरी दी गई है.
जनहितकारी कर्मचारियों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी गई है. संभागीय आयुक्त स्तर पर उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी (एमजीएनआरईजीए), सहायक कायक्रम अधिकारी, सहायक लेखा अधिकारी, डेटा एंट्री ऑपरेटर, वरिष्ठ क्लर्क, कनिष्ठ क्लर्क, लघु टाइपिस्ट और चपरासी के पदों को मंजूरी दी गई है.
मनरेगा का मुख्यालय नागपुर में कार्यरत है और यहां भारतीय प्रशासनिक सेवा से एक आयुक्त स्तरीय अधिकारी तथा बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी पद कार्यरत हैं. ‘विकसित भारत जी राम जी’ योजना का स्वरूप और रूपरेखा अभी तक तय नहीं की गई है. हालांकि, यह योजना राज्य सरकार द्वारा संचालित की जाएगी, जिसमें राज्य सरकार की हिस्सेदारी अधिक और केंद्र सरकार की हिस्सेदारी कम होगी, और 1०० दिनों के बजाय 125 दिनों से अधिक रोजगार की गारंटी दी गई है. हालांकि, अधिकारियों और कर्मचारियों के स्वरूप के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिली है. इसलिए, इस योजना में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी चिंतित हैं.








