चोरी के संदेह में पुलिसकर्मी की बर्बरता, प्राथमिकी दर्ज

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– पुलिस थाने में नाबालिग बच्चों की बेल्ट से पिटाई

नरखेड़ :- नरखेड़ तहसील के दिदरगांव में चोरी के संदेह में पुलिस द्वारा नाबालिग बच्चों को थाने में बेरहमी से पीटने का मामला सामने आया है। प्रकरण में जलालखेड़ा पुलिस थाने में संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। घटना शनिवार, 20 दिसंबर को हुई थी। मारपीट करने वाले पुलिसकर्मी का नाम पुरुषोत्तम धोंडे बताया गया है। सूत्रों के अनुसार दिंदरगांव निवासी हेमराज नागमोते के घर से 10 हजार रुपए चोरी होने की शिकायत जलालखेड़ा पुलिस थाने में दर्ज हुई थी। इस आधार पर 21 दिसंबर को बीट जमादार ने चोरी के संदेह में 3 नाबालिग विधि संघर्षग्रस्त बालकों को हिरासत में लिया। दो बालकों को थाने ले जाकर बेल्ट से बेरहमी से पीटा गया। जातिसूचक गालियां देने का आरोप भी पीड़ित बच्चों के अभिभावकों ने लगाया है।

पीड़ित बच्चों के पिता ने मारपीट की शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस थाने में शिकायत लेने से टालमटोल किए जाने का आरोप लगाया गया है। यह मामला प्रहार जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री बच्चू कडू के संज्ञान में लाया गया। जानकारी मिलते ही बच्चू कडू ने नागपुर जिला पुलिस अधीक्षक से फोन पर संपर्क कर तत्काल मामला दर्ज कर जांच की मांग की। इसके बाद जलालखेड़ा पुलिस थाने में पुलिसकर्मी पुरुषोतम धोंडे के खिलाफ धारा 118 (1), 115 (2), 120 (1) बीएनएस तथा बाल संरक्षण अधिनियम-2015 की धारा 75 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

एट्रोसिटी के तहत कार्रवाई की मांग

जातिसूचक गालियां देने के आरोप को देखते हुए संबंधित पुलिस अधिकारी व कर्मी के खिलाफ अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार प्रतिबंधक अधिनियम (एट्रोसिटी) के तहत मामला दर्ज करने की मांग प्रहार जनशक्ति पार्टी के काटोल-नरखेड़ विधानसभा प्रमुख दिनेश निंबालकर ने की है। इस संबंध में उपविभागीय अधिकारी सागर खर्डे को ज्ञापन सौंपा गया है। इस अवसर पर प्रहार दिव्यांग क्रांति आंदोलन संगठन प्रमुख अजय पांडे, महिला आघाड़ी पदाधिकारी वर्षा ठोंबरे, वंदना क्षीरसागर, अभिनय सातपुते, सोमकुंवर सहित पीड़ित बच्चों के अभिभावक उपस्थित थे। इस मामले की शिकायत बाल संरक्षण कक्ष को मिलने के बाद जिला बाल संरक्षण अधिकारी मुश्ताक पठान के मार्गदर्शन में चाइल्ड हेल्पलाइन के अनिकेत भिवगड़े, मीनाक्षी धडाडे ने दिंदरगंव जाकर पीड़ित बच्चों के बयान दर्ज किए।