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सिकलसेल मुक्ति के लिए 24 दिनों तक चलेगा ‘अरुणोदय’ अभियान

– जिले के सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क जांच एवं उपचार की सुविधा उपलब्ध

गोंदिया :- पूर्व विदर्भ के गोंदिया जिले में सिकलसेल बीमारी की बढ़ती संख्या को देखते हुए इस रोग पर जड़ से नियंत्रण पाने के लिए गोंदिया जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने ठोस कदम उठाए हैं। जिले को सिकलसेल मुक्त बनाने के उद्देश्य से ‘अरुणोदय’ नामक विशेष जांच अभियान 15 – जनवरी से 7 फरवरी, 2025 के दौरान चलाया जाएगा। सिकलसेल एक आनुवंशिक रक्त विकार है, जिसकी पहचान केवल रक्त जांच के माध्यम से ही संभव है। इसलिए इस अभियान के अंतर्गत आम नागरिकों से स्वेच्छा से जांच कराने की अपील जिला स्वास्थ्य प्रशासन की ओर से की गई है। महाराष्ट्र राज्य सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा इस अभियान की सूक्ष्म योजना तैयार की गई है और जिले की सभी स्वास्थ्य इकाइयों को सतर्क रखा गया है। दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचकर जांच, निदान एवं आवश्यक उपचार पर विशेष जोर दिया जाएगा। यह जानकारी चिकित्साधिकारी डॉ. सुवर्णा हुबेकर ने दी। जिला शल्य चिकित्सक डा. पुरुषोत्तम पटले ने बताया कि सिकलसेल की श्रृंखला तोड़ने के लिए विवाह पूर्व जांच अत्यंत आवश्यक है। यह रोग माता-पिता से बच्चों में आनुवंशिक रूप से फैलता है। इसलिए समाज में जनजागरूकता बेहद जरूरी है और शिक्षकों, अभिभावकों व युवाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। सिकलसेल रोगियों को प्रतिदिन पर्याप्त पानी पीना चाहिए, पौष्टिक आहार लेना चाहिए, ठंड और अत्यधिक गर्मी से बचाव करना चाहिए तथा डॉक्टर की सलाह अनुसार नियमित उपचार लेना चाहिए। उचित देखभाल से रोगी सामान्य जीवन जी सकते हैं। सिकलसेल के दो प्रकार होते हैं जिसमें वाहक और रोगी का समावेश है। बार-बार बुखार आना, जोड़ों में दर्द, कमजोरी, एनीमिया जैसे लक्षण दिखाई देते ही तुरंत जांच करानी चाहिए। सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क जांच एवं उपचार की सुविधा उपलब्ध है।

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