– जिस शिक्षक ने बोर्ड परीक्षा में बांटी ‘नकल की पर्चियां’, वही अब स्कूल का ‘बॉस’!
– अभिभावकों में भारी आक्रोश
महाराष्ट्र के गोंदिया जिले के चिंचगढ़ स्थित श्रीराम विद्यालय से शिक्षा व्यवस्था को झकझोर देने वाला एक बड़ा और गंभीर मामला सामने आया है, जिसने पूरे जिले में शिक्षा प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले वर्ष बारहवीं बोर्ड परीक्षा के दौरान छात्रों को खुलेआम नकल करवाते हुए जिस शिक्षक का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, उसी शिक्षक को अब विद्यालय का मुख्याध्यापक नियुक्त कर दिया गया है। इस फैसले के बाद अभिभावकों, स्थानीय नागरिकों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों में जबरदस्त आक्रोश फैल गया है। वायरल वीडियो में कथित रूप से शिक्षक परीक्षा कक्ष में छात्रों को कॉपी और उत्तर उपलब्ध कराते दिखाई दे रहे थे, जिससे परीक्षा की पारदर्शिता और नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ती नजर आई थीं। यह पूरा मामला देवरी के गट शिक्षण अधिकारी के संज्ञान में भी लाया गया था, लेकिन आरोप है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद अब तक न तो किसी उच्चस्तरीय जांच की घोषणा हुई और न ही किसी प्रकार की कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई। उल्टा जिस शिक्षक पर आरोप लगे, उसे ही मुख्याध्यापक बना दिया गया, जिससे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और सरकार के नकलमुक्त अभियान की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है। जब इस संबंध में गट शिक्षण अधिकारी से सवाल किया गया तो उनका जवाब था कि वीडियो लगभग एक वर्ष पुराना है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि वीडियो पुराना होने से घटना की गंभीरता कम नहीं हो जाती। अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कर दोषी शिक्षक और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस मामले में कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो इससे न केवल शिक्षा व्यवस्था की साख पर गहरा असर पड़ेगा, बल्कि छात्रों के भविष्य और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता भी खतरे में पड़ जाएगी।
कैमरे में कैद हुई थी ‘बेईमानी’
वायरल हुई तस्वीर और वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि शिक्षक देशमुख परीक्षा कक्ष में घूम-घूम कर छात्रों को उत्तर उपलब्ध करा रहे हैं। यह घटना वर्ष 2023-24 की 12वीं बोर्ड परीक्षा की है। अभिभावकों का आरोप है कि परीक्षा की गोपनीयता भंग करने वाले ऐसे व्यक्ति को दंडित करने के बजाय प्रशासन ने उसे मुख्याध्यापक का पद देकर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है?
अधिकारियों का गैर-जिम्मेदाराना जवाब
जब इस पूरे प्रकरण पर देवरी के गट शिक्षण अधिकारी (BEO) मोटघरे से जवाब माँगा गया, तो उन्होंने मामले की गंभीरता को कम करते हुए कहा कि “वीडियो पुराना है”। अधिकारी का यह तर्क गले नहीं उतर रहा है, क्योंकि अपराध चाहे पुराना हो या नया, वह नियमानुसार कार्रवाई का पात्र होता है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, विद्यालय में कार्यरत शिक्षक देशमुख का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। यह वीडियो वर्ष 2023–24 की बारहवीं बोर्ड परीक्षा के दौरान का बताया जा रहा है।
वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि शिक्षक परीक्षा कक्ष में छात्रों को उत्तर बताते हुए और नकल करवाने में मदद करते हुए नजर आ रहे हैं। इस घटना से परीक्षा की गोपनीयता और शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे।
नकलमुक्त अभियान पर उठे सवाल
सरकार और शिक्षा विभाग लगातार नकलमुक्त अभियान चलाने का दावा करते रहे हैं। परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और ईमानदार बनाने के लिए समय-समय पर कड़े निर्देश भी जारी किए जाते हैं।लेकिन अगर नकल करवाने के आरोपों से घिरे शिक्षक ही मुख्याध्यापक बन जाएं, तो यह पूरे शिक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि प्रशासन शिक्षा व्यवस्था को लेकर आखिर किस तरह का संदेश देना चाहता है?








