शेंडा व कोहमारा सहवन क्षेत्र में सागवान तस्करी का संदेह

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– दो महीने बाद भी जांच ठंडे बस्ते में

यासीन शेख, गोंदिया :- सड़क अर्जुनी वनपरिक्षेत्र अंतर्गत शेंडा और कोहमारा सहवन क्षेत्र में सागवान के पेड़ों की बड़े पैमाने पर अवैध कटाई और तस्करी का गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना को करीब दो महीने बीत जाने के बावजूद संबंधित तस्करों का अब तक पता नहीं चल पाया है, जिससे वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं और क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

मिली जानकारी के अनुसार, वनपरिक्षेत्र कार्यालय सड़क अर्जुनी के अंतर्गत शेंडा-कोयलारी क्षेत्र सहायक कार्यालय की सीमा में शेंडा स्थित पुराने आश्रम स्कूल के पीछे, तुपाल पलतेकी के खेत के पास स्थित झाड़ीदार जंगल में लगभग 4 से 5 फुट गोलाई वाले सागवान के करीब चार पेड़ों की कटाई की गई। तस्करों ने पेड़ों के ठूंठ जेसीबी की मदद से उखाड़कर यह दिखाने की कोशिश की कि वहां कोई पेड़ मौजूद ही नहीं था।

बताया जाता है कि इन सागवान की लकड़ियों को शेंडा से कापसी-नागपुर मार्ग के जरिए परिवहन करने के लिए टी.पी. (ट्रांजिट पास) भी तैयार किया गया था। इसमें कुछ लकड़ियों पर पासिंग हथौड़ा क्रमांक अंकित था, जबकि शेष 42 नग लकड़ियों पर कोई भी क्रमांक नहीं पाया गया। पासिंग की गई लकड़ी की मात्रा लगभग 9 घनमीटर दर्शाई गई थी, जबकि उसमें करीब 6 घनमीटर अवैध सागवान मिलाए जाने का संदेह व्यक्त किया जा रहा है।

इसी बीच 3 जनवरी 2026 को रात करीब 9 बजे किसी अज्ञात व्यक्ति ने इस मामले की शिकायत भंडारा स्थित उपवनरक्षक कार्यालय में की। इसके बाद साकोली के सहायक वनसंरक्षक संजय मेंढे के मार्गदर्शन में लाखनी के वनक्षेत्र अधिकारी धनविजय ने अपने दल के साथ रात करीब 10 बजे लाखनी हाईवे पर संबंधित ट्रक को रोक लिया। जांच के दौरान ट्रक में 42 नग सागवान अवैध पाए जाने पर वन अपराध दर्ज कर लकड़ी जब्त कर ली गई।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कोयलारी-कोहळीटोला मार्ग पर मंगेश लाडे के अतिक्रमित खेत तथा उसके उत्तर दिशा में हेमंतू असना मडावी की वनभूमि से भी सागवान के पेड़ों की कटाई की गई थी। यहां लगभग 4 से 6 फुट गोलाई वाले करीब पांच सागवान के पेड़ काटे गए, जिनसे करीब 5 से 6 घनमीटर लकड़ी मिलने का अनुमान है।

सूत्रों के अनुसार 1 से 2 जनवरी के बीच काटी गई यह लकड़ी शेंडा वन क्षेत्र से करीब पांच किलोमीटर दूर कोहमारा सहवन क्षेत्र के डोंगरगांव डिपो के पास लाई गई और हाईवे किनारे स्थित देशमुख राइस मिल के पीछे दूसरी खसरा भूमि में रखी लकड़ियों के ढेर में मिलाकर छिपा दी गई।

इस पूरे मामले की जानकारी पत्रकार भामा चुन्हे को मिलने के बाद उन्होंने 17 जनवरी 2026 को राइस मिल के पीछे रखी लकड़ियों के ढेर की तस्वीरें लीं। इसके बाद जब संबंधित खेत में जाकर निरीक्षण किया गया तो वहां सागवान के कुछ ठूंठों के अवशेष जलाए जाने के प्रमाण भी दिखाई दिए।

बताया जाता है कि पत्रकारों द्वारा घटनास्थल का दौरा किए जाने की जानकारी वन कर्मचारियों को मिलते ही 20 जनवरी 2026 को वसंत राइस मिल के पीछे रखी चार-पांच बड़ी लकड़ियों को जब्त कर लगभग 200 मीटर दूर स्थित वन विभाग के डोंगरगांव डिपो में जमा कराया गया। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस लकड़ी के ढेर में आदिवासियों के सागवान के साथ अवैध लकड़ी मिलाई गई थी, उस पूरे साठे पर कार्रवाई की जानी चाहिए थी।

मामला संदिग्ध, जांच की मांग

जब्त की गई लकड़ियों पर किसी प्रकार का आधिकारिक निशान नहीं मिलने से पूरा मामला संदिग्ध माना जा रहा है। शेंडा क्षेत्र से महज पांच किलोमीटर दूर कोहमारा सहवन क्षेत्र में लकड़ी पहुंचने के बावजूद कार्रवाई में करीब 15 दिन की देरी क्यों हुई, यह भी सवाल उठ रहा है। इन घटनाओं के चलते वन विभाग के कुछ अधिकारी-कर्मचारियों और लकड़ी तस्करों के बीच मिलीभगत होने की चर्चा क्षेत्र में हो रही है। नागरिकों ने इस मामले की गहन जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।