यासीन शेख, गोंदिया गोरेगांव :- गोरेगांव तहसील के मौजा डव्वा निवासी एक किसान ने वर्ष 2002 में खरीदी गई कृषि भूमि का फेरफार दर्ज होने के बावजूद आज तक उसके नाम से 7/12 व नमूना 8 का उतारा उपलब्ध नहीं होने का गंभीर मामला सामने आया है। इस संबंध में संबंधित राजस्व कर्मचारियों की लापरवाही की जांच कर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग किसान जितेंद्र माणिकचंद पारधी ने की है।
मिली जानकारी के अनुसार, जितेंद्र पारधी ने 26 जून 2002 को मौजा डव्वा सटवा साजा क्रमांक 2 मे स्थित गट नंबर 424 की कुछ कृषि भूमि खरीदी थी। इस खरीदी के बाद 29 जनवरी 2003 को फेरफार क्रमांक 572 के तहत तलाठी और मंडल अधिकारी द्वारा फेरफार रजिस्टर में नोंद दर्ज किए जाने का उल्लेख रिकॉर्ड में है। हालांकि, इतने वर्षों के बाद भी उनके नाम से 7/12 और नमूना 8 उतारे की नोंद तलाठी कार्यालय के अभिलेख में उपलब्ध नहीं होने की जानकारी उन्हें दी गई।
पारधी ने इस संबंध में वर्ष 2019 में सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी थी, जिसमें फेरफार नोंद दर्ज होने की पुष्टि हुई। लेकिन वास्तविक अभिलेख में उनके नाम की नोंद नहीं होने के कारण उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल सका, ऐसा आरोप उन्होंने लगाया है।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए तिरोड़ा उपविभागीय अधिकारी कार्यालय ने तहसीलदार गोरेगांव को पत्र भेजकर पूरे प्रकरण का वस्तुस्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा की गई शिकायत पर पिछले पांच वर्षों में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
उपविभागीय अधिकारी कार्यालय ने तहसीलदार को अंतिम अवसर देते हुए सात दिनों के भीतर स्पष्ट अभिप्राय सहित अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। निर्धारित समय में रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करने पर यह मामला जिलाधिकारी गोंदिया तथा विभागीय आयुक्त नागपुर को भेजे जाने की चेतावनी भी दी गई है।
इस बीच, न्याय नहीं मिलने पर परिवार सहित तहसील कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन आमरण अनशन करने की चेतावनी भी शिकायतकर्ता जितेंद्र पारधी ने दी है।
इस संबंध में तत्कालीन तहसीलदार साईंकिरन नंदाला ने कहा है कि डव्वा महसूल अधिकारी से चर्चा कर फेरफार दस्तावेजों की जांच की जाएगी तथा तत्काल सातबारा पर नोंद करने के आदेश दिए जाएंगे



