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मणिपुर में मेइरा पाईबी की महिलाएं उतरीं सड़कों पर

– दिन में रास्ते रोक कर धरना, रात में मशाल रैलियों से कानून-व्यवस्था संभाली  

मणिपुर :- बीते 7 अप्रैल को रॉकेट हमले में दो बच्चों की मौत हो गई थी। प्रदर्शनों में 3 मौतें हो गई थीं। तबसे विरोध-प्रदर्शन चल रहे हैं। अशांति के बीच 18 अप्रैल से पूर्ण बंद लागू है। सामान्य जीवन ठप है। इसी बीच अब मेइरा पाइबी समूह की महिलाएं सड़कों पर उतर आईं हैं। हजारों महिलाओं का यह समूह शांति-व्यवस्था के लिए न केवल सड़कों पर प्रदर्शन कर रहा है, बल्कि सामाजिक स्तर पर लोगों को भी जोड़ रहा है। ये महिलाएं दिन में रास्ते रोक रही हैं, धरना दे रही हैं। वहां से न पुलिस निकल सकती है, न कोई और। वहीं, रात में मशाल रैलियों से इलाकों की पहरेदारी भी कर रही हैं।

एक प्रदर्शनकारी महिला ने बताया- घर संभालना, आंदोलन में जाना और रोजी-रोटी की चिंता, तीनों को साथ लेकर चलना चुनौतीपूर्ण है। इसके बावजूद यह मेरी नैतिक जिम्मेदारी है और मैं हर चीज संतुलित कर रही हूं।

बड़े स्तर पर आंदोलन की तैयारी

लगातार बंद के कारण आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है। ख्वैरामबंद इमा मार्केट में कुछ महिला विक्रेता दुकानें खोलने को मजबूर हुई हैं। अनीता लौरेंबम ने कहा कि इसका मतलब यह नहीं कि वे आंदोलन के खिलाफ हैं। वे इस काम के बाद आंदोलन में शामिल होंगी।

नागरिक संगठन ‘कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी’ ने 25 अप्रैल को बड़े स्तर पर आंदोलन की घोषणा की है।80 के दशक में शराबखोरी और मादक पदार्थ की समस्या से निपटने के लिए यह आंदोलन बना। तब भी मशाल से गश्त की जाती थी।

उद्देश्य सामुदायिक भावना को बढ़ावा देना था, ताकि मुद्दे सुलझाने के लिए लोग मिलकर काम करें। इस आंदोलन ने मानवाधिकारों के हनन, अफस्पा के तहत कार्रवाई के खिलाफ भी कड़ा रुख अपनाया।

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