Saturday, April 25, 2026
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620 स्कूलों पर बंदी का खतरा: महाराष्ट्र की शिक्षा नीति पर बवाल

– 25,000 शिक्षक हो सकते हैं अतिरिक्त: नए शासन निर्णय से बढ़ी चिंता

– मराठी स्कूल संकट में: भाषा और संस्कृति पर मंडराया खतरा

नागपुर :- महाराष्ट्र में शिक्षा क्षेत्र को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. अखिल भारतीय माध्यमिक शिक्षक महासंघ व अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ से जुड़ी महाराष्ट्र राज्य शिक्षक परिषद ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र भेजकर 15 मार्च 2024 के शासन निर्णय को तत्काल रद्द करने की मांग की है. संगठन का दावा है कि इस फैसले के चलते राज्य में करीब 620 स्कूल बंद होने की कगार पर हैं, जबकि 25,000 शिक्षक अतिरिक्त हो सकते हैं. इसमें नागपुर जिले में 70 स्कूलों और करीब 350 शिक्षकों पर गाज गिरने की संभावना है.

संगठन के कार्याध्यक्ष, पूर्व विधायक नागो गाणार ने शिक्षा उपसंचालक के माध्यम से भेजे गए इस पत्र में कहा गया है कि सरकार की वर्तमान शैक्षणिक नीति के कारण मराठी माध्यम की शालाएं गंभीर संकट में आ गई हैं. यदि यही स्थिति बनी रही तो मराठी भाषा और संस्कृति के अस्तित्व पर भी खतरा मंडराने लगेगा. संगठन ने आरोप लगाया कि 15 मार्च 2024 के शासन निर्णय के तहत संच मान्यता (स्टाफिंग पैटर्न) में किए गए बदलाव पूरी तरह ‘अशैक्षणिक’ हैं. इससे अनुदानित, अंशतः अनुदानित, स्थानीय स्वराज्य संस्था और सरकारी स्कूलों की शैक्षणिक व प्रशासनिक व्यवस्था कमजोर हो रही है और स्कूलों को बंद करने की स्थिति बन रही है. शैक्षणिक सत्र 2024 – 25 में इस नीति के कारण कई स्कूलों में शून्य शिक्षक पद मंजूर किए गए जिससे शिक्षा क्षेत्र में भारी असंतोष फैला. विरोध के चलते सरकार को अतिरिक्त शिक्षकों के समायोजन की प्रक्रिया भी स्थगित करनी पड़ी थी.

आरटीई कानून का उल्लंघन

संगठन ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 (आरटीई) के प्रावधानों के खिलाफ है. छात्र-शिक्षक अनुपात कक्षा-वार तय होना चाहिए, जबकि सरकार ने इसे समूह आधारित कर दिया है. इससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर असर पड़ेगा. मुख्याध्यापक पद को भी छात्र संख्या से जोड़ना अनुचित बताया गया है.

ग्रामीण शिक्षा पर गंभीर असर

पत्र में दावा किया गया है कि आज भी राज्य के 8,213 गांवों में प्राथमिक स्कूल नहीं हैं और इसके बावजूद मौजूदा स्कूलों को बंद करने की नीति अपनाई जा रही है. इसे समाज के लिए घातक और शिक्षा के बाजारीकरण की दिशा में कदम बताया गया है, शिक्षक परिषद ने सरकार से मांग की है कि 15 मार्च 2024 का शासन निर्णय तत्काल रद्द किया जाए, कक्षा-वार शिक्षक नियुक्ति और मुख्याध्यापक पद सुनिश्चित किया जाए. शिक्षा नीति की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति गठित की जाए, संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते निर्णय नहीं लिया गया तो राज्य में विस्फोटक स्थिति बन सकती है.


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