– 2 एकड़ में सिमटा श्मशान घाट
नागपुर :- पूर्व नागपुर के पारडी श्मशान घाट की आरक्षित जमीन को लेकर एक बड़ा और बेहद संवेदनशील घोटाला उस समय उजागर हुआ जब मनपा में सत्तापक्ष नेता बाल्या बोरकर ने ही स्मार्ट सिटी के अधिकारियों की मिलीभगत के चलते 17.5 एकड़ का दहनघाट मात्र 2 एकड़ में सिमटकर रहने की जानकारी पत्र-परिषद में दी. उन्होंने बताया कि स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत श्मशान घाट के लिए आरक्षित 17.5 एकड़ जमीन में से 15.5 एकड़ जमीन को किसे दिया गया यही एक खोज का विषय बन गया है जिसके चलते अब अंतिम संस्कार के लिए सिर्फ 2 एकड़ जमीन ही बची है.
बैठक में हुआ चौंकाने वाला खुलासा : सत्तापक्ष नेता बाल्या बोरकर ने कहा कि इस भारी गड़बड़ी का खुलासा हाल ही में महापौर, उपमहापौर और स्थायी समिति के अध्यक्ष की मौजूदगी में शहर के श्मशान घाटों के सौंदर्याकरण को लेकर हुई एक बैठक के दौरान हुआ. जब 17.5 एकड़ आरक्षित जमीन पर बाउंड्रीवॉल (कंपाउंड) बनाने का प्रस्ताव रखा गया तो स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने बताया कि वहां अब केवल 2 एकड़ जमीन ही उपलब्ध है. डीपी (डेवलपमेंट प्लान) के पुराने रिकॉर्ड के अनुसार, तलमले नामक व्यक्ति की कुल 38 एकड़ जमीन पर विभिन्न आरक्षण थे जिनमें से विशेष रूप से 17.5 एकड़ जमीन सिर्फ श्मशान घाट के लिए आरक्षित की गई थी.
भूमाफियाओं के कब्जे की जताई आशंका : उन्होंने कहा कि इस घोटाले के कारण पूर्व नागपुर के पारडी, भांडेवाड़ी, पुनापुर और भरतवाड़ा जैसे इलाकों की करीब 2.5 लाख की आबादी को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
वर्तमान में श्मशान घाट इतना छोटा हो गया है कि यदि एक साथ 3-4 शव अंतिम संस्कार के लिए आ जाएं तो लोगों और परिजनों के लिए वहां खड़े होने या अंदर जाने तक की जगह नहीं बचती है. भूमाफियाओं द्वारा मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए तय की गई जगह पर भी कब्जा करने से लोगों में भारी आक्रोश है.
उन्होंने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए महापौर ने स्मार्ट सिटी से तत्काल रिपोर्ट तलब की है और यह पता लगाने का आदेश दिया है कि यह आरक्षण कैसे रद्द किया गया और इसे वापस सरकार के नियंत्रण में कैसे लाया जा सकता है. सत्तापक्ष नेता बाल्या बोरकर ने आशंका जताई है कि इस जमीन घोटाले में पूरी स्मार्ट सिटी योजना के अधिकारी और संभवतः तत्कालीन आयुक्त भी शामिल हो सकते हैं.
कानूनी लड़ाई की तैयारी
बोरकर ने इस पूरे मामले में स्थानीय कार्यकर्ताओं से इसके खिलाफ तुरंत याचिका दायर करने की अपील की है और वादा किया है कि जमीन वापस हासिल करने के लिए वे अपनी तरफ से वकील उपलब्ध कराएंगे. साथ ही मनपा में अधिकारियों के खिलाफ भी जांच के बाद उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी. उल्लेखनीय है कि महापौर की अध्यक्षता में हुई बैठक के दौरान स्मार्ट सिटी से लेकर तमाम संबंधित विभाग के उच्च अधिकारी भी उपस्थित रहे हैं किंतु किसी के भी पास जमीन को लेकर कोई जानकारी नहीं थी जिसे लेकर आश्चर्य जताया जा रहा है.