– जनप्रतिनिधि हैं मौन
नागपुर :- विदर्भ के साथ दशकों से भेदभाव किया जा रहा है. अब विदर्भ राज्य आंदोलन समिति ने एक बार फिर नाबार्ड से मिले 500 करोड़ रुपयों में से विदर्भ को सिर्फ 116 करोड़ देने और पश्चिम महाराष्ट्र को आधी रकम दिए जाने पर अन्याय का आरोप लगाया है. नाबार्ड निधि वितरण में विदर्भ के साथ हुए इस अन्याय का विरोध करते हुए समिति के अध्यक्ष वामनराव चटप सहित विदर्भवादियों ने नाराजी जताई है. चटप ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और पुल निर्माण के लिए नाबार्ड द्वारा हाल ही में 500 करोड़ रुपये का ऋण सार्वजनिक निर्माण विभाग के कुल 148 परियोजनाओं के लिए मंजूर किया गया है लेकिन इस निधि के वितरण में विदर्भ के साथ अन्याय किया गया है, जबकि मुख्यमंत्री यहीं के हैं. उन्होंने बताया कि पश्चिम महाराष्ट्र के केवल 5 जिलों को 237 करोड़ रुपये दिए गए हैं, उस पर भी एक अकेले सातारा जिले को ही 150 करोड़ दिए गए हैं. यह दुर्भाग्यपूर्ण है. विदर्भ के 11 जिलों के लिए केवल 116 करोड़ रुपये मंजूर किए गए और मराठवाड़ा के 8 जिलों को केवल 55 करोड़ रुपये मिले. उन्होंने कहा कि यह 500 करोड़ रुपये की निधि राज्य के 27 जिलों को दी गई है. यदि इसे समान रूप से बांटा जाता तो प्रत्येक जिले को लगभग 18.51 करोड़ रुपये मिलते. विदर्भ में केवल अमरावती जिले को 23.18 करोड़ रुपये मिले हैं और यहां के बाकी किसी जिले को औसत राशि भी नहीं मिली.
विदर्भवादियों ने आरोप लगाया कि गठबंधन की सरकार लगातार विदर्भ पर अन्याय कर रही है. खास बात यह है कि मुख्यमंत्री विदर्भ से होने के बावजूद ऐसी स्थिति बनी है जिससे यह स्पष्ट होता है कि पहले की तरह अब भाजपा सरकार भी पश्चिम महाराष्ट्र के प्रभाव में काम कर रही है. समिति ने यह भी कहा कि विदर्भ, मराठवाड़ा और कोंकण जैसे क्षेत्रों पर इतना अन्याय हो रहा है, फिर भी जनप्रतिनिधि पूरी तरह मौन हैं. यह अधिक चिंताजनक है. नाबार्ड निधि वितरण में विदर्भ के साथ हुए इस अन्याय का विरोध करते हुए समिति के प्रकाश पोहरे, रंजना मामर्डे, डॉ. श्रीनिवास खांदेवाले, मुकेश मासुरकर, अरुण केदार, डॉ. बीआर राजपूत, सुनील चोखारे, सुरेश वानखेडे और तात्यासाहब मते ने जोरदार निषेध किया है.