– हफ्ते में एक बार सफाई, बाकी दिन कचरे का साम्राज्य; प्रशासन बेखबर
– कभी खिलाड़ियों की पहचान था राजाबाक्षा मैदान, अब असामाजिक तत्वों का अड्डा
नागपुर :- सिटी में कई मैदान अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहे हैं. रखरखाव का अभाव और प्रशासन की अनदेखी से कई मैदान व्यर्थ पड़े हैं. इन मैदानों में राजाबाक्षा मैदान भी शामिल है. मैदान का पूरी तरह से सत्यानाश हो चुका है. यहां गंदगी की भरमार देख मन खट्टा हो जाता है. स्थानीय नागरिकों ने बताया कि यहां हफ्ते में केवल एक ही दिन सफाई होती है. इस कारण गंदगी और कूड़े का ढेर आम दृश्य बन गया है. मैदान में फैली गंदगी ने न केवल सौंदर्य को प्रभावित किया है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी खतरा पैदा कर दिया है. रोजाना असामाजिक तत्व मैदान में डेरा डाल लेते हैं जिससे आसपास के नागरिक असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. रात के समय यहां शराब पीने वाले लोग जाम छलकाते हैं और असभ्य हरकतें करते हैं. इस वजह से परिवार और बुजुर्ग लोग मैदान में आने से डरते हैं. बता दें कि रामबाग, मेडिकल चौक के पास राजाबाक्षा मैदान मौजूद है. यहां समस्याओं का अंबार लग चुका है. लोगों का आरोप है कि कोई भी जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा. इससे जनता के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है.
लोगों ने बताया कि रोज रात में यहां शराबियों का झुंड इकट्ठा हो जाते हैं. ये शराबी शराब का सेवन करने के बाद शराब की बोतलें, सिगरेट के पैकेट और अन्य कचरा मैदान में ही फेंक देते हैं. नशे में धुत शराबी जोर-जोर से गाली-गलौज करते हैं. इस कारण मैदान के पास से गुजरने में नागरिक भयभीत रहते हैं. लोगों ने यहां पुलिस गश्त बढ़ाने की मांग की है. प्रशासन की उदासीनता पर सवाल करते हुए स्थानीय निवासियों ने कहा कि यदि प्रशासन जल्द कार्रवाई नहीं करता है तो यह क्षेत्र पूरी तरह से असुरक्षित और अव्यवस्थित हो जाएगा.
एक और चिंता का विषय है जॉगिंग ट्रैक. राजाबाक्षा मैदान का जॉगिंग ट्रैक जो कभी स्वास्थ्य और खेल प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र था, अब नाम मात्र रह गया है.
ट्रैक पर गंदगी और रखरखाव के अभाव के कारण नियमित जॉगिंग और दौड़ना मुश्किल हो गया है. इस कारण मॉर्निंग वॉक के लिए स्थानीय नागरिकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.
राजाबाक्षा मैदान कभी नागपुर शहर की शान माना जाता था। यहां सुबह-शाम खिलाड़ियों की चहल-पहल, बच्चों की किलकारियां और बुजुर्गों की सैर देखने को मिलती थी। लेकिन आज यह मैदान अपनी दुर्दशा पर आंसू बहाने को मजबूर है। रखरखाव के अभाव, प्रशासनिक लापरवाही और नियमित सफाई न होने से मैदान पूरी तरह बदहाल हो चुका है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि मैदान की सफाई केवल हफ्ते में एक बार की जाती है। बाकी दिनों में यहां कचरे के ढेर, प्लास्टिक की बोतलें, गंदगी और झाड़ियां जमा रहती हैं। हालत इतनी खराब हो चुकी है कि लोगों ने मैदान में जाना तक कम कर दिया है।
मैदान में अभ्यास करने आने वाले युवाओं का कहना है कि यहां दौड़ना और खेलना मुश्किल हो गया है। जगह-जगह फैली गंदगी और उबड़-खाबड़ जमीन के कारण दुर्घटना का खतरा बना रहता है। कई खिलाड़ियों ने बताया कि बरसात के दिनों में मैदान दलदल में तब्दील हो जाता है, जबकि गर्मियों में धूल का गुबार उड़ता रहता है।
स्थानीय रहिवासी भी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि शहर में करोड़ों रुपए सौंदर्यीकरण पर खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन सार्वजनिक मैदानों की हालत सुधारने की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
रात के समय मैदान में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। नागरिकों का कहना है कि पर्याप्त लाइटिंग और सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण मैदान असुरक्षित होता जा रहा है। कई परिवारों ने बच्चों को यहां खेलने भेजना बंद कर दिया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद जिम्मेदार विभाग केवल आश्वासन देता है। मैदान की घास सूख चुकी है, बैठने की व्यवस्था टूटी हुई है और परिसर में जगह-जगह कचरा फैला हुआ है।
नागरिकों ने मांग की
मैदान की रोजाना सफाई सुनिश्चित की जाए
नियमित देखरेख और घास कटाई की व्यवस्था हो
खिलाड़ियों के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं
परिसर में सुरक्षा और लाइटिंग बढ़ाई जाए
मैदान के सौंदर्यीकरण के लिए विशेष योजना बनाई जाए
शहर के ऐतिहासिक मैदानों को बचाने की जरूरत
नागपुर के कई सार्वजनिक मैदान आज इसी तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं। यदि समय रहते प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले समय में ये मैदान केवल नाम मात्र रह जाएंगे। राजाबाक्षा मैदान की वर्तमान स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर शहर की खेल और सामाजिक विरासत को बचाने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?
– फाईल फोटो