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अजनी ब्रिज : सपना ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ का, सफर ‘डेली ट्रैफिक टेस्ट’ का

– 36 महीने बीते, अजनी अब भी पूछ रहा — “और कितना इंतजार?”

– नागपुर का एंडलेस ब्रिज : उद्घाटन से पहले ही बन गया मजाक का विषय

  नागपुर :- शहर में ट्रैफिक जाम अब समस्या कम और ‘संस्कार’ ज्यादा बन चुका है. सुबह घर से निकलने वाला व्यक्ति अब भगवान से यही प्रार्थना करता है कि अजनी चौक पार हो जाए, बाकी जिंदगी तो जैसे-तैसे कट ही जाएगी. इसका पहला कारण है, अंग्रेजों के जमाने का खस्ता हाल रेलवे ब्रिज. दूसरा है, इसी से लगकर बनाया जा रहा है केबल स्टेड ब्रिज.

अग्रेजों के जमाने के ब्रिज को जैसे-तैसे डेंटिंग-पेंटिंग करके चलाया जा रहा है. ब्रिज के दोनों और ट्रैफिक के बुरे हाल होते हैं. दूसरी तरफ, केबल स्टेड ब्रिज जो डेडलाइन बीतने के बाद 50 प्रतिशत भी पूरा नहीं हो सका है. ऐसे में शहरवासियों के लिए नजर आने वाला ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ अब ‘एंडलेस प्रोजेक्ट’ नजर आने लगा है.

निश्चित तौर पर चलते रेलवे ट्रैफिक के बीच केबल स्टेड ब्रिज बनाना एक चुनौती है लेकिन यह बात भी उतनी ही राही है कि केन्द्रीय मंत्री गडकरी द्वारा भूमिपूजन के बाद क्लीयरेंस जैसे

रेलवे की ओर से भी रास्ता खुला रखा गया, जबकि यह ब्रिज नागपुर-मुंबई और दक्षिण भारत के लिए जाने वाली ट्रेनों के लिए मेन लाइन है. हैरानी की बात है कि भूमिपूजन के 33 महीनों बाद

हालांकि अब निर्माण में तेजी दिख रही है लेकिन इतनी नहीं कि अगले एक वर्ष में भी शहरवासियों को इस केबल स्टेड ब्रिज से वाहन चलाने का अवसर मिले. वर्तमान में दोनों पायलान पूरे हो चुके है और एनक्रोजेस लगाये जा रहे है

विडंबना यह है कि शहर का दूसरा 6 लेन केबल स्टेंड ब्रिज बनने का सपना अब नागपुरवासियों के वेर्य की को आधुनिक इंॉास्ट्रक्चर परीक्षा बन गया है. जनता चाहिए लेकिन उससे पहले भरोसा चाहिए कि जो वादा किया गया है वह समय पर पूरा भी होगा. फिलहाल अजनी ब्रिज के नीचे हर दिन वाहनों की लंबी कतारें और लोगों की बढ़ती झुंझलाहट यही पूछ रही है- 36 महीने बीते, और कितना इंतजार?’

रोजाना हजारों वाहन अजनी चौक पर रेंगते नजर आते हैं. ऑफिस जाने वाले कर्मचारी, स्कूल बसे, एम्बुलेंस और मरीज्, सब एक ही किस्मत के भरोसे फंसे रहते हैं. पुल पार करने के दौरान वाहन चालकों को डर बना रहता है कि कहीं अभी ना चंस जाये, पहले ही ब्रिज अपनी उम्र पूरी कर चुका है. इसके बाद ब्रिज पर ऊबड़-खाबड़ डामरीकरण और ब्रिज के दोनों ओर ट्रैफिक की अजीब सी व्यवस्था माथे पर बल लाने को काफी है, अब तो वाहन चालक यह सोचकर रास्ता बदल देते हैं कि कहीं अजनी में फंस गए तो पूरा दिन खराब हो जाएगा.

जानकारों का कहना है कि किसी भी बड़े प्रोजेक्ट में तकनीकी दिक्कते आ सकती है लेकिन सवाल यह है कि क्या समयसीमा तय करते वक्त इन चुनौतियों का अंदाजा नहीं था?

केबल स्टेड ब्रिज अब भी अधूरा काम

अगर था तो फिर इतनी जल्दबाजी में तारीखें क्यों घोषित की गई? और अगर नहीं था तो क्या बिना पूरी तैयारी के प्रोजेक्ट शुरू कर दिया गया? अब स्थिति यह है कि लोग उद्‌घाटन की तारीख सुनते ही मुस्कुराने लगते हैं. कई नागरिक मजाक में कहते हैं कि यह पुल पूरा होने से पहले बच्चे बड़े हो जाएंगे के साथ डेक यानि सड़क का निर्माण किया जायेगा. यह काम भी काफी चुनौती भरा होता है. इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि अभी शहरवासियों को कितना लंबा इंतजार करना है.

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