– भीषण गर्मी से दहक रहे हैं जंगल
– 20 दिन में प्रादेशिक के 41 हेक्टेयर क्षेत्र में आग
नागपुर :- मई महीने में सूरज आग उगल रहा है। आसमान से बरसती यह तपिश आम जनजीवन के साथ-साथ अब वनक्षेत्र के लिए भी बेहद संवेदनशील और खतरनाक साबित हो रही है। नागपुर प्रादेशिक वनक्षेत्र की बात करें, तो बीते महज 20 दिन के भीतर ही आग लगने की 79 घटनाएं सामने आई हैं, जिसके कारण 41.69 हेक्टेयर जंगल जलकर खाक हो चुका है। गनीमत रही कि, वन विभाग की मुस्तैदी से सही समय पर स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया, जिससे कोई बड़ी अनहोनी नहीं हुई।
54 बार इंसानों की लापरवाही : वन विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार पिछले 20 दिनों में दर्ज की गई आग की घटनाओं के पीछे दो मुख्य कारण रहे हैं। पहला 25 घटनाएं ऐसी थीं, जो अत्यधिक तापमान और सूखी पत्तियों के आपसी घर्षण के कारण जंगलों के भीतर प्राकृतिक रूप से लगीं। रिकॉर्ड 54 घटनाएं इंसानों की लापरवाही और गलतियों के कारण बाहरी वनक्षेत्रों में भड़कीं।
बारिश और ठंड के मौसम में जंगलों में आग की आशंका बेहद कम रहती है, लेकिन गर्मी शुरू होते ही यह खतरा कई गुना बढ़ जाता है। आंकड़े बताते हैं कि, फरवरी से लेकर अब तक (लगभग साढ़े तीन महीने में) नागपुर के जंगलों में कुल 445 आग की घटनाएं हो चुकी हैं। 189 बार अंदरूनी जंगलों में आग लगी। 256 बार बाहरी सीमाओं पर आग भड़की। इस समूचे सीजन में अब तक 365.45 हेक्टेयर जंगल जल चुका है, जिससे वन विभाग को हजारों रुपए का नुकसान उठाना पड़ा है।
जंगल सुलगने के मुख्य कारण : वन विभाग के अनुसार नागपुर प्रादेशिक जंगल के आसपास कई ऐसे गांव हैं, जहां किसानों के खेत सीधे जंगल की सीमाओं से लगे हुए हैं। इन दिनों किसान अपने खेतों को साफ करने के लिए कचरा और पराली जला रहे हैं। भीषण गर्मी और तेज हवा के कारण इन खेतों से उड़ने वाली चिंगारियां पल भर में जंगल तक पहुंच जाती हैं और सूखी घास को सुलगा देती हैं। गर्मी के दिनों में महुआ के फूल बीनने या अन्य वनोपज इकट्ठा करने के लिए जंगल जाने वाले कुछ लोगों द्वारा बीड़ी-सिगरेट पीकर फेंकने या अनजाने में आग सुलगती छोड़ देने से भी बड़े हादसे हो रहे हैं।