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बलिराजा पाणंद रस्ता परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोप

◼️३ करोड़ रुपये के फर्जी बिल जारी करने से सरकारी खजाने को भारी नुकसान |

◼️उदयसिंह उर्फ गज्जू यादव ने की शिकायत सीधे पालकमंत्री से |

सचिन चौरसिया,रामटेक :- मुख्यमंत्री बलिराजा खेत पाणंद रास्ता योजना के तहत स्वीकृत कार्यों में गंभीर अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और सरकारी धन के गबन का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। भाजपा के नागपुर जिला ग्रामीण उपाध्यक्ष और मुख्यमंत्री बलिराजा खेत पाणंद सड़क योजना समिति के सह-अध्यक्ष उदयसिंह उर्फ गज्जू यादव ने नागपुर जिले के पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को लिखित शिकायत सौंपकर पूरे मामले की गहन जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। इस बयान से राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है। पालकमंत्री को सौंपे गए बयान में उदयसिंह यादव ने आरोप लगाया है कि रामटेक के उप -विभागीय अधिकारी और उप-विभागीय मजिस्ट्रेट के प्रशासनिक आदेशों के अनुसार, निर्वाचन क्षेत्र में कुल ९१ किलोमीटर लंबी के ७३ पाणंद रास्तो को मंजूरी दी गई है। हालांकि, इस योजना को लागू करते समय ठेकेदार चयन से लेकर कार्यों के आवंटन तक, हर स्तर पर नियमों का उल्लंघन किया गया है। किसानों के अधिकारों के लिए बनाई गई ‘बालिराजा’ योजना में सरकारी धन का इस प्रकार दुरुपयोग किसानों और सरकार दोनों के साथ अन्याय है। इसलिए, पालकमंत्री को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए और तत्काल उच्च स्तरीय बैठक बुलानी चाहिए। अब पूरा जिला इस बात पर नजर रखे हुए है कि प्रशासन और पालकमंत्री इस पर क्या कदम उठाते हैं

बयान में तीन प्रमुख गंभीर आपत्तियां हैं |

१) ठेकेदार चयन में अपारदर्शिता:- जिला स्तरीय पैनल में ७ ठेकेदार विधिवत पंजीकृत थे और दरें भी तय थीं, इसके बावजूद निर्वाचन क्षेत्र से बाहर के दो ठेकेदारों को “निर्वाचन क्षेत्र से बाहर के ठेकेदारों को काम नहीं दिया जाना चाहिए” के झूठे बहाने से अवैध रूप से चुना गया। दूसरी ओर, पैनल में पंजीकरण के लिए आए १२ ठेकेदारों में से ७ को मंजूरी दी गई और ५ को मामूली त्रुटियों के कारण अस्वीकार कर दिया गया। यह सरकारी निर्णय के पारदर्शिता प्रावधानों का सीधा उल्लंघन है।

२) पुराने कार्यों के लिए ३ करोड़ रुपये के फर्जी बिल:- इस योजना के तहत वर्ष शुरू होने से पहले ही एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है कि लगभग २५ पुराने कार्यों के फर्जी बिलों को नए बताकर इस योजना से हटाने की पूरी तैयारी चल रही है। इससे सरकारी खजाने से कम से कम ३ करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार की प्रबल संभावना है।

३) हितों के अनुरूप कार्य का वितरण:-स्वीकृत ७३ कार्यों का ठेकेदारों के बीच समान वितरण नहीं किया गया है। इनमें से १५ कार्य सीधे एक ठेकेदार को दिए गए हैं, जबकि केवल ५ कार्य दूसरे ठेकेदार को दिए गए हैं। इसमें विशिष्ट उद्देश्यों, वित्तीय हितों और सरकारी प्रक्रियाओं के दुरुपयोग के स्पष्ट प्रमाण हैं।


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