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उमरेड के ‘गोपाला तालाब’ पर बड़ा घोटाला? 14 हेक्टेयर जलाशय को भरने और रिकॉर्ड में हेराफेरी के आरोप

– जमीन बचाओ फाउंडेशन ने उठाए गंभीर सवाल, कलेक्टर से उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग

नागपुर/उमरेड :- नागपुर जिले के उमरेड स्थित सर्वे नंबर 353 में दर्ज अधिसूचित जलाशय ‘गोपाला तालाब’ को कथित रूप से भरकर भूमि उपयोग में बदलाव किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सामाजिक संस्था जमीन बचाओ फाउंडेशन ने इस पूरे प्रकरण को सार्वजनिक करते हुए जिला प्रशासन से उच्चस्तरीय जांच कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

संस्था के अनुसार राजस्व अभिलेखों में यह भूमि स्पष्ट रूप से तालाब के रूप में दर्ज है और वर्षों से ग्रामीणों एवं पशुओं के लिए महत्वपूर्ण जलस्रोत रही है। इसके बावजूद तालाब को भरने और समतलीकरण कर अन्य उपयोग के लिए तैयार किए जाने के आरोप लगाए गए हैं।

रिकॉर्ड में गड़बड़ी और फर्जी नामांतरण का आरोप

फाउंडेशन ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर कई अनियमितताओं का दावा किया है। संस्था का आरोप है कि कुछ मामलों में नामांतरण संबंधी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए गए, जबकि कई प्रविष्टियां कथित रूप से अपूर्ण या संदिग्ध जानकारी के आधार पर दर्ज की गईं। राजस्व अभिलेखों में गलत मृत्यु तिथियां दर्ज कर रिकॉर्ड में फेरबदल किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं।

सरकारी योजना के दुरुपयोग की आशंका

मामले में महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी “गाळमुक्त धरण आणि गाळयुक्त शिवार” योजना के संभावित दुरुपयोग की भी आशंका जताई गई है। संस्था का दावा है कि तालाब से निकाली गई गाद के परिवहन और उपयोग में अनियमितताएं हुई हैं। साथ ही ई-अवनी प्रणाली के तहत अनिवार्य डिजिटल ट्रैकिंग और निगरानी प्रक्रिया के पालन पर भी सवाल खड़े किए गए हैं।

फाउंडेशन ने मांग की है कि गाद के वास्तविक उपयोग, लाभार्थियों की पात्रता तथा स्थल सत्यापन की स्वतंत्र जांच कराई जाए। यदि गाद का उपयोग जलाशय संरक्षण के बजाय भूमि समतलीकरण अथवा अन्य उद्देश्यों के लिए किया गया है, तो यह योजना की मूल भावना के विपरीत माना जाएगा।

पर्यावरण पर मंडरा रहा खतरा

संस्था ने चेतावनी दी है कि लगभग 14.27 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले इस जलाशय के अस्तित्व पर संकट आने से भूजल पुनर्भरण, जल भंडारण क्षमता, जैव विविधता और ग्रामीण जल सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। फाउंडेशन का कहना है कि तालाब केवल जमीन का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि सार्वजनिक प्राकृतिक संसाधन है, जिसकी सुरक्षा प्रशासन की जिम्मेदारी है।

कलेक्टर से छह प्रमुख मांगें

जमीन बचाओ फाउंडेशन ने जिला कलेक्टर से तत्काल भराव कार्य रोकने, संयुक्त जांच समिति गठित करने, सभी नामांतरण रिकॉर्ड का विशेष ऑडिट कराने, ई-अवनी डेटा और परिवहन रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच कराने तथा दोषी अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

15 दिनों में कार्रवाई नहीं तो हाईकोर्ट का दरवाजा

संस्था के निदेशक प्रमोद महाजन ने कहा कि यह मामला पहले भी जनप्रतिनिधियों द्वारा विधानसभा में उठाया जा चुका है। उन्होंने प्रशासन को 15 दिनों के भीतर ठोस कार्रवाई करने का अल्टीमेटम दिया है। चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं हुई तो नागपुर खंडपीठ में जनहित याचिका (PIL) दायर कर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की जाएगी।

अब सभी की नजर जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं, तो यह मामला जलाशय संरक्षण, राजस्व रिकॉर्ड प्रबंधन और सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।


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