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मनपा की लापरवाही से नाराज़ नागरिक, खुद सीवर चैंबर में उतरकर की सफाई

– 150 शिकायतें बेअसर: नगरसेवक ने फावड़ा उठाकर खोली प्रशासन की पोल

नागपुर :- लंबे समय से सीवेज की चोकिंग को लेकर शिकायत करने के बाद भी मनपा प्रशासन की नींद नहीं खुल रही है, ऐसे में बुधवार को हनुमाननगर जोन अंतर्गत ताजाबाद परिसर में नागरिकों ने बुधवार सीवर चैंबर में उतरकर गंदगी की सफाई की। इस सफाई आंदोलन का नेतृत्व मनपा में एआईएमआईएम के गुट नेता और नगरसेवक शकील पटेल ने किया। नगरसेवक शकील पटेल ने खुद चेंबर में उतरकर फावड़े से चेंबर के भीतर से मिट्‌टी और मलबा को निकाला। इस आंदोलन के चलते बरसात पूर्व नाला और चेंबर समेत ड्रेनज सफाई के दावों की कलई खुल गई है।

ताजाबाद परिसर में अंडरग्राउंड ड्रेनेज नेटवर्क की बेहद खराब स्थिति बनी हुई। बरसात से पहले चेंबर और सीवेज लाइन की सफाई को लेकर मनपा प्रशासन को कई बार ऑनलाइन शिकायत पोर्टल पर दर्ज कराई गई है, लेकिन पूरे इलाके से अब तक सीवेज लाइन चोकिंग को लेकर 150 से अधिक शिकायत प्रलंबित बनी हुई है।

इतना ही नहीं कई संकरी गलियों वाले इलाकों में चेंबर सफाई के लिए सालों से काेई कर्मचारी नहीं पहुंचा है। चेंबर में चोकिंग के चलते मेनहोल ओवरफ्लो होने से पूरे इलाके में गंदगी और बदबू फैल रही है। ऐसे में मनपा की लापरवाही को देखते हुए नगरसेवक शकील पटेल के नेतृत्व में नागरिकों ने खुद चेंबर में उतरकर सफाई की। वहीं प्रशासन का दावा है कि अंडरग्राउंड ड्रेनेज नेटवर्क के अधिकांश हिस्से अतिक्रमण और इमारतों के निर्माणकार्य के चलते बेहद खराब स्थिति में हैं। इन हिस्सों को अमृत-2 योजना में बदलने का प्रस्ताव बनाया गया है। हालांकि अब भी सफाई में कोई भी कोताही नहीं हो रही है। सर्वाेच्च न्यायालय से मानव आधारित चेंबर की सफाई को पाबंद किया गया है। बगैर सुरक्षा उपकरण या मशीन के सीवर चैंबर में उतरना स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा करता है। ऐसे में प्रतिकात्मक आंदोलन में बगैर सुरक्षा के उतरने को लेकर प्रशासन पर प्रश्नचिन्ह लगा रहा है। करीब तीन माह पहले धरमपेठ जोन में भी चेंबर में उतरकर सफाई करने का वीडियों सोशल मीडिया पर आया था।

चेंबर सफाई के लिए कर्मचारी ही नहीं

नगरसेवक और गुट नेता, एआईएमआइएम शकील पटेल के मुताबिक ताजबाद इलाके में सीवेज सिस्टम की नियमित सफाई और देखभाल के लिए पर्याप्त कर्मचारी नहीं हैं। प्रभाग क्रमांक (ड) और (क) में 55 हजार की जनसंख्या वाले इलाके में महज 32 सफ़ाई कर्मचारी मौजूद हैं, जबकि इसी प्रभाग के (अ) और (ब) में 90 हजार आबादी पर 63 कर्मचारी उपलब्ध कराएं गए है। पूरे प्रभाग में सीवेज चोकिंग की दिक्कत को दूर करने के लिए कर्मचारी नहीं है। ऐसे में प्रशासन की लापरवाही के विरोध में प्रतिकात्मक आंदोलन किया गया है।


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