‘क्लब माफिया’ और प्रशासन की कथित साठगांठ? लाइसेंस अभी ‘पेंडिंग’, लेकिन करोड़ों की डील की चर्चा तेज
चंद्रपुर: चंद्रपुर जिले की सीमा से लगे पोडसा, वरुड, सोनुर्ली और गडचांदूर जैसे इलाकों में प्रस्तावित मनोरंजन क्लबों को लेकर प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज है। इन क्लबों के लाइसेंस अभी जिलाधिकारी कार्यालय में प्रलंबित बताए जा रहे हैं और धरातल पर संचालन भी शुरू नहीं हुआ है। इसके बावजूद, सूत्रों में इन फाइलों को लेकर कथित तौर पर बड़े स्तर पर सौदेबाजी की चर्चा हो रही है।
फाइलों से ज्यादा ‘सेटिंग’ की चर्चा
सूत्रों के अनुसार, जिलाधिकारी कार्यालय में क्लब लाइसेंस से संबंधित करीब 22 आवेदन लंबित हैं। प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि इन फाइलों को प्राथमिकता से आगे बढ़ाने और आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कराने के नाम पर कथित तौर पर 2 से 3 करोड़ रुपये तक की डील की बातें सामने आ रही हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सूत्रों में यह भी चर्चा है कि कुछ फाइलों को तकनीकी अड़चनों से बचाने तथा एनओसी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कथित रूप से अग्रिम राशि के लेन-देन की बातें कही जा रही हैं। इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
पुरानी कार्रवाई फिर चर्चा में
सीमावर्ती क्षेत्रों के कुछ क्लब पहले भी पुलिस की कार्रवाई के दायरे में आ चुके हैं। वरुड के एक क्लब पर तत्कालीन अपर पुलिस अधीक्षक अतुल कुलकर्णी द्वारा की गई कार्रवाई के बाद कथित अवैध गतिविधियों को देखते हुए संबंधित क्लबों के विरुद्ध कार्रवाई का प्रस्ताव भेजे जाने की चर्चा रही थी।
‘तेलंगाना पैटर्न’ को लेकर सवाल
सूत्रों के अनुसार, सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रस्तावित क्लबों का मुख्य आकर्षण तेलंगाना से आने वाले जुआरियों को माना जा रहा है। चर्चा है कि इसी मॉडल को ध्यान में रखकर क्लब संचालन की तैयारी की जा रही है। हालांकि, लाइसेंस अभी जारी नहीं हुए हैं। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि लंबित फाइलों को लेकर इतनी सक्रियता क्यों दिखाई जा रही है और इसके पीछे क्या कारण हैं।
एसीबी की गतिविधियों को लेकर भी चर्चाएं
प्रशासनिक सूत्रों में यह भी चर्चा है कि कथित वित्तीय लेन-देन की खबरों के बाद मामले पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की नजर हो सकती है। हालांकि, इस संबंध में किसी भी जांच या कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
– फाईल फोटो




