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एस. बी. जैन स्कूल में मासूमों की जान के साथ खिलवाड़? ओवरलोड स्कूल बस बनी ‘चलता-फिरता खतरा’!

– सावनेर में पालकों का फूटा गुस्सा, एस. बी. जैन स्कूल पर बच्चों की सुरक्षा से समझौते के गंभीर आरोप

– क्या बच्चों की सुरक्षा अब सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह गई है? क्या स्कूल प्रबंधन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?

सावनेर :- सावनेर एवं आसपास के क्षेत्र में संचालित एस. बी. जैन स्कूल की बसों को लेकर पालकों में भारी आक्रोश व्याप्त है। पालकों का आरोप है कि करीब 35 विद्यार्थियों की क्षमता वाली बस में प्रतिदिन 40 से 50 बच्चों को बैठाकर स्कूल लाया-ले जाया जा रहा है। इतना ही नहीं, कई बच्चों को लगभग एक घंटे तक खड़े होकर सफर करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी हो गई हैं।पालकों का कहना है कि क्षमता से अधिक बच्चों को बस में बैठाना और लंबे समय तक खड़े होकर यात्रा कराना न केवल परिवहन नियमों की अनदेखी है, बल्कि मासूम बच्चों की जान को भी खतरे में डालने जैसा है। उनका आरोप है कि यदि अचानक ब्रेक लग जाए, वाहन अनियंत्रित हो जाए या कोई सड़क दुर्घटना हो जाए, तो सबसे अधिक खतरा उन बच्चों को होगा जो खड़े होकर सफर कर रहे हैं।यदि पालकों के आरोप सही हैं, तो यह मामला केवल नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा के प्रति गंभीर लापरवाही का भी संकेत देता है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या स्कूल प्रबंधन और संबंधित विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं?स्कूल बसों की सुरक्षा को लेकर सरकार और परिवहन विभाग (RTO) द्वारा समय-समय पर कड़े नियम बनाए गए हैं, लेकिन सवाल उठता है कि क्या इन नियमों का पालन सिर्फ कागज़ों तक ही सीमित है? क्या जिम्मेदार अधिकारी सब कुछ देखकर भी मौन हैं?पालकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, बसों की वास्तविक क्षमता की जांच तथा यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अब निगाहें स्कूल प्रशासन, परिवहन विभाग (RTO) और जिला प्रशासन पर टिकी हैं। सवाल सिर्फ नियमों का नहीं, बल्कि हर दिन स्कूल जाने वाले सैकड़ों मासूम बच्चों की सुरक्षा और उनके भविष्य का है। यदि समय रहते इस मामले की निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई नहीं हुई, तो पालकों का आक्रोश और भी बढ़ सकता है।

पालकों के सवाल

– क्या बच्चों की सुरक्षा अब सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह गई है?

– क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन जागेगा?

– क्या परिवहन विभाग (RTO) स्कूल बसों की नियमित जांच कर रहा है?

– क्या स्कूल बसों के लिए बनाए गए नए सुरक्षा नियम सिर्फ फाइलों तक ही सीमित हैं?


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