– फिर भी 3,887 में से सिर्फ 58 का ही ऑडिट
– सूचना के अधिकार से हुआ खुलासा
नागपुर :- नागपुर जिले की 33 सहकारी संस्थाओं में वित्तीय अनियमितताएं सामने आने के बावजूद सहकार, विपणन एवं वस्त्रोद्योग विभाग की लेखापरीक्षण (ऑडिट) प्रक्रिया बेहद धीमी बनी हुई है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार, मार्च 2026 में ऑडिट के लिए आवंटित 3,887 सहकारी संस्थाओं में से मई 2026 के अंत तक केवल 58 संस्थाओं का ही लेखापरीक्षण पूरा हो सका, जबकि 3,829 संस्थाओं का ऑडिट अब भी लंबित है।
विभागीय सह-निबंधक, सहकारी संस्था (लेखापरीक्षण) कार्यालय से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, मार्च 2026 में जिले की 3,887 सहकारी संस्थाओं को ऑडिट के लिए सूचीबद्ध किया गया था। हालांकि, दो महीने बीत जाने के बाद भी अधिकांश संस्थाओं का लेखापरीक्षण शुरू नहीं हो सका।
वित्तीय पारदर्शिता पर उठे सवाल
जिले की 33 सहकारी संस्थाओं में वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा होने के बाद भी ऑडिट की धीमी रफ्तार ने सहकारी संस्थाओं के वित्तीय लेन-देन की पारदर्शिता और सहकार विभाग की कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का मानना है कि समय पर लेखापरीक्षण नहीं होने से भविष्य में होने वाली वित्तीय गड़बड़ियों का समय रहते पता लगाना भी मुश्किल हो सकता है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2022 में ऑडिट के लिए 3,031 सहकारी संस्थाएं आवंटित की गई थीं। इनमें से 2,503 संस्थाओं का लेखापरीक्षण पूरा कर लिया गया था, जबकि 528 संस्थाओं का ऑडिट लंबित रहा। इसके मुकाबले वर्ष 2026 में लंबित मामलों की संख्या कई गुना अधिक हो गई है।
33 संस्थाओं में सामने आई वित्तीय अनियमितताएं
31 मार्च 2026 तक किये गये लेखापरीक्षण के दौरान 33 सहकारी संस्थाओं में वित्तीय गड़बड़ियां उजागर हुई थीं। इन मामलों में संबंधित संस्थाओं के पदाधिकारियों तथा कुछ अधिकारियों के खिलाफ भी आपराधिक मामले दर्ज किये गये हैं। आरटीआई से सामने आए इन आंकड़ों ने सहकार विभाग की कार्यप्रणाली, लेखापरीक्षण व्यवस्था और सहकारी संस्थाओं में वित्तीय जवाबदेही को लेकर कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।




