– एनटीसीए की पहली आधिकारिक गणना में बाघों की संख्या दोगुनी से अधिक
नागपुर,संवाददाता :– वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में नागपुर के लिए बड़ी उपलब्धि सामने आई है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए ) की वर्ष 2026 की अखिल भारतीय बाघ गणना के तहत पहली बार नागपुर के प्रादेशिक (टेरिटोरियल) वन क्षेत्र में कराई गई आधिकारिक वैज्ञानिक गणना में जिले में 42 से 45 बाघों की मौजूदगी का अनुमान लगाया गया है।
यह संख्या पहले के लगभग 18 बाघों के अनुमान से दोगुनी से भी अधिक है। यह पहली बार है जब नागपुर के टेरिटोरियल फॉरेस्ट डिवीजन को राष्ट्रीय बाघ गणना में आधिकारिक रूप से शामिल किया गया। सर्वेक्षण दिसंबर 2025 में शुरू हुआ और तीन चरणों में पूरा किया गया।
आधुनिक तकनीक से हुई गणना
बाघों की सटीक गणना के लिए वन विभाग ने पूरे क्षेत्र में 1,200 कैमरा ट्रैप लगाए। इसके साथ ही लाइन ट्रांसेक्ट पद्धति का उपयोग कर बाघों की गतिविधियों और उनके आवास का वैज्ञानिक अध्ययन किया गया। अधिकारियों के अनुसार आंकड़ों का विश्लेषण अभी जारी है, लेकिन अंतिम संख्या 45 से कम होने की संभावना नहीं है।
इन क्षेत्रों में सबसे अधिक बाघ
प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार रामटेक, पारशिवनी, पावनी, उत्तर उमरेड और दक्षिण उमरेड वन परिक्षेत्र नागपुर जिले में बाघों के प्रमुख आवास के रूप में उभरे हैं। इससे इन क्षेत्रों में वन संरक्षण और वन्यजीव प्रबंधन की सफलता भी स्पष्ट होती है।
जंगलों की सेहत का भी हुआ आकलन
बाघों की गणना के साथ-साथ सर्वेक्षण में जंगलों की समग्र स्थिति का भी मूल्यांकन किया गया। इसमें वनस्पति और वन क्षेत्र, पक्षियों, उभयचरों एवं जलीय जैव विविधता तथा जंगलों में मानवीय हस्तक्षेप के स्तर का भी अध्ययन किया गया। सर्वेक्षण का पूरा डेटा बाघ गणना समन्वयक को भेज दिया गया है। अब भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) विस्तृत विश्लेषण के बाद अंतिम रिपोर्ट जारी करेगा, जिसके बाद नागपुर के टेरिटोरियल वन क्षेत्रों में बाघों की आधिकारिक संख्या घोषित की जाएगी।




