– बेहोश करने के बाद इलाज के दौरान तोड़ा दम, ओवरडोज या बीमारी की आशंका
अमरावती/नागपुर :- अमरावती जिले में पिछले दो सप्ताह से दहशत का पर्याय बनी आदमखोर बाघिन की मौत के बाद अब कई सवाल खड़े हो गए हैं। बाघिन की मौत से हजारों नागरिकों ने राहत की सांस ली है, लेकिन उसे ट्रैंकुलाइज करने से लेकर मौत तक आखिर क्या हुआ, इसे लेकर वन विभाग भी जांच में जुट गया है। अधिकारियों का कहना है कि बाघिन की मौत का सही कारण मेडिकल और फोरेंसिक रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
घटनाक्रम की शुरुआत सोमवार को मोर्शी तहसील में बाघिन द्वारा तीसरी और अंतिम हत्या किये जाने के बाद हुई। घटना के बाद बाघिन शव के पास ही मौजूद रही। आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुटने लगे। इसी दौरान बाघिन का पीछा कर रही ट्रैंकुलाइजिंग टीम भी मौके पर पहुंच गई। बाघिन द्वारा पहले की गई दो हत्याओं के बाद क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति भी गंभीर हो गई थी। वहीं, वन विभाग पर उसे पकड़ने का राजनीतिक दबाव भी बढ़ रहा था। राज्य के वन मंत्री गणेश नाईक ने अधिकारियों को बाघिन को तत्काल रेस्क्यू करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद उसे पकड़ने के लिए कई टीमें गठित की गईं।
सोमवार को चांदूर बाजार क्षेत्र में वन विभाग की टीम का बाघिन से आमना-सामना हुआ। टीम ने उसे ट्रैंकुलाइज कर दिया। इसके बाद बाघिन को दीर्घकालीन देखभाल के लिए नागपुर स्थित गोरेवाड़ा वन्यजीव अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र ले जाने की योजना थी। करीब तीन घंटे की सड़क यात्रा शुरू करने से पहले उसे बेहोशी की अवस्था से बाहर लाना जरूरी था। मुख्य वन संरक्षक जयोति बैनर्जी ने बताया कि बाघिन को इसके लिए पास ही स्थित वन विभाग की एक सुविधा में ले जाया गया, लेकिन वहां उसकी मौत हो गई। बाघिन की मौत के बाद अमरावती में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ लोगों ने इसे दवा की अधिक मात्रा दिए जाने का परिणाम बताया, जबकि कुछ ने बाघिन के पहले से बीमार होने की आशंका जताई। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) श्रीनिवास रेड्डी ने कहा कि बाघिन को मारने का कोई इरादा नहीं था और मेडिकल रिपोर्ट से ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट होगी। उन्होंने बताया, ‘मुझे जानकारी दी गई थी कि बाघिन किसी बीमारी से पीड़ित थी। दरअसल, सोमवार को मैं उसे गोली मारने के आदेश देने वाला था, लेकिन जब मुझे बताया गया कि उसे ट्रैंकुलाइज कर लिया गया है, तो मैंने अपने आदेश रोक दिए।’ एक वरिष्ठ वन अधिकारी ने बताया कि अपरिहार्य कारणों से अमरावती के बाहर से भी कई टीमों को बुलाना पड़ा था। उन्होंने कहा कि अमरावती की एक टीम पिछले कई दिनों से लगातार काम कर रही थी, जिससे टीम के सदस्य थक गए थे और उनमें से एक को अस्पताल में भर्ती भी कराना पड़ा.
पोस्टमार्टम से खुलेगा मौत का राज
बाघिन की मौत की वजह अब जांच का विषय है। जयोति बैनर्जी ने बताया कि मंगलवार सुबह बाघिन का पोस्टमार्टम किया जाएगा। इसके दौरान उसके रक्त, ऊतक और अन्य नमूने लेकर फोरेंसिक जांच के लिए भेजे जाएंगे। इन्हीं रिपोर्टों से यह पता चल सकेगा कि बाघिन किसी बीमारी से पीड़ित थी या उसकी मौत किसी अन्य कारण से हुई।बाघिन के अंतिम संस्कार को लेकर भी पोस्टमार्टम के बाद निर्णय लिया जाएगा।





