नागपुर :- वैनगंगा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, नागपुर में ‘साइबर हाइजीन और साइबर एथिक्स’ विषय पर साइबर जागरूकता कार्यशाला का उत्साहपूर्वक आयोजन किया गया। एडुसन फाउंडेशन की ओर से तथा साइबर सेल, नागपुर पुलिस के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में 600 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया।
कार्यशाला में नागपुर पुलिस के साइबर सेल की आचल चित्तारी और एडुसन फाउंडेशन के निदेशक निलेश एच. काले ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।
आचल चित्तारी ने ऑनलाइन धोखाधड़ी के विभिन्न तरीकों, साइबर अपराधों और उनके कानूनी परिणामों के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी दी। उन्होंने APK फाइलों, गेमिंग फ्रॉड, सोशल मीडिया स्कैम तथा अन्य डिजिटल खतरों से सावधान रहने का आह्वान किया। साथ ही, एंड्रॉयड मोबाइल में उपलब्ध महत्वपूर्ण सुरक्षा सेटिंग्स और व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए उपयोगी सुरक्षा सुविधाओं की जानकारी भी दी। ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी के प्रति भी विद्यार्थियों को जागरूक किया गया।
निलेश एच. काले ने वास्तविक उदाहरणों और केस स्टडी के माध्यम से ‘साइबर हाइजीन’ और ‘साइबर एथिक्स’ की अवधारणाओं को समझाया। उन्होंने डिजिटल दुनिया में जिम्मेदार व्यवहार, सुरक्षित डिजिटल फुटप्रिंट तथा दैनिक जीवन में होने वाली विभिन्न प्रकार की साइबर धोखाधड़ी के संबंध में मार्गदर्शन दिया।
सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग करते समय ‘जीरो ट्रस्ट’ दृष्टिकोण अपनाने की सलाह काले ने विद्यार्थियों को दी। उन्होंने अनजान लिंक, संदेश, फाइलों या ऑनलाइन संपर्कों के संबंध में विशेष सावधानी बरतने का आह्वान किया। धमकी भरे या संदिग्ध संदेश प्राप्त होने पर उनका जवाब न देते हुए तुरंत किसी विश्वसनीय व्यक्ति या संबंधित अधिकारी से संपर्क करने की सलाह उन्होंने दी। साइबर समस्याओं का सामना करते समय घबराने या खुद को अकेला समझने की जरूरत नहीं है, ऐसा भी उन्होंने विद्यार्थियों से कहा।
ChatGPT और अन्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) उपकरणों का शैक्षणिक कार्यों के लिए जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने के संबंध में भी काले ने मार्गदर्शन दिया। उन्होंने AI से प्राप्त जानकारी की सत्यता की जांच करने, उसका उचित तरीके से उपयोग करने तथा कॉपीराइट वाली सामग्री के संबंध में सावधानी बरतने का आह्वान किया।
कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों द्वारा अनुशासित एवं सक्रिय सहभागिता के लिए निलेश काले ने उनकी सराहना की। साथ ही, कार्यक्रम के सफल आयोजन में महाविद्यालय के प्रबंधन और शिक्षकवर्ग द्वारा दिए गए सहयोग के लिए उन्होंने आभार व्यक्त किया।
कार्यशाला के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों ने साइबर सुरक्षा, ऑनलाइन धोखाधड़ी और डिजिटल सुरक्षा से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे। विद्यार्थियों ने अपना फीडबैक दर्ज कराया और साइबर सुरक्षा की शपथ लेते हुए डिजिटल तकनीक का सुरक्षित, नैतिक और जिम्मेदार तरीके से उपयोग करने का संकल्प लिया।
इस कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को साइबर खतरों के बारे में व्यावहारिक जानकारी मिली। साथ ही, व्यक्तिगत, शैक्षणिक और व्यावसायिक जीवन में सुरक्षित एवं जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार अपनाने के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया गया।


