Wednesday, March 4, 2026
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रामाटोला–मानागड डामरीकरण सड़क में निकृष्ट निर्माण का आरोप

– उच्च स्तरीय जांच की मांग

यासीन शेख, गोंदिया सालेकसा :- सालेकसा तालुका के आदिवासी एवं दुर्गम क्षेत्र में रामाटोला से मानागड तक बनाए जा रहे डामरीकरण सड़क निर्माण कार्य को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं.स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि यह निर्माण कार्य अत्यंत निकृष्ट दर्जे का किया जा रहा है तथा संबंधित अधिकारी और ठेकेदार की मिलीभगत से शासन की लाखों रुपये की निधि का दुरुपयोग हो रहा है. इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग जोर पकड़ रही है.

यह सड़क निर्माण कार्य सार्वजनिक बांधकाम विभाग गोंदिया अंतर्गत स्वीकृत किया गया है.जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में इस कार्य के लिए लगभग 20 लाख रुपये की मंजूरी दी गई थी. कुल 300 मीटर लंबाई के डामरीकरण का प्रावधान है, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि कई स्थानों पर सड़क की चौड़ाई निर्धारित मानक से कम रखी गई है और वास्तविक निर्माण कार्य भी पूर्ण लंबाई में नहीं किया गया है। कुछ हिस्सों में डामर की परत पतली दिखाई दे रही है, जिससे सड़क की गुणवत्ता पर प्रश्नचिन्ह लग गया है.

ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण के दौरान न तो तकनीकी मानकों का पालन किया जा रहा है और न ही नियमित निरीक्षण हो रहा है. प्रभारी उपविभागीय अधिकारी और कनिष्ठ अभियंता के मुख्यालय में नियमित रूप से उपस्थित न रहने की चर्चा भी जोरों पर है, जिसके कारण ठेकेदार मनमानी ढंग से कार्य कर रहा है। आरोप है कि आधा किलोमीटर से भी कम दूरी के इस डामरीकरण कार्य में भारी अनियमितता कर शासकीय राशि का लाभ उठाया जा रहा है.

स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि इसी मार्ग पर पूर्व में सीमेंट सड़क का निर्माण किया गया था, जो कुछ ही समय में खराब हो गया था. अब दोबारा डामरीकरण के नाम पर कार्य किया जा रहा है, लेकिन गुणवत्ता को लेकर फिर वही लापरवाही दोहराई जा रही है. यदि समय रहते तकनीकी जांच नहीं कराई गई तो आगामी बारिश में सड़क के उखड़ने और दुर्घटनाओं की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता.

ग्रामपंचायत स्तर पर भी नाराजगी देखी जा रही है.मानागड ग्रामपंचायत की सरपंच वनिता सिरसाम ने कहा कि शासन द्वारा इस सड़क के लिए लाखों रुपये स्वीकृत किए गए हैं, लेकिन ग्रामपंचायत को न तो कार्य की विस्तृत जानकारी दी जाती है और न ही भूमिपूजन जैसे कार्यक्रमों में आमंत्रित किया जाता है.उन्होंने स्पष्ट कहा कि सड़क का डामरीकरण कार्य निकृष्ट दर्जे का प्रतीत हो रहा है और इसकी निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए. यदि अनियमितता सिद्ध होती है तो संबंधित ठेकेदार और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए.

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मौके पर तकनीकी टीम भेजकर सड़क की गुणवत्ता, मोटाई और लंबाई की जांच कराई जाए तथा पूरी प्रक्रिया की पारदर्शी समीक्षा की जाए. आदिवासी एवं सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण यहां की जनता पहले ही मूलभूत सुविधाओं से वंचित है.ऐसे में यदि विकास कार्यों में ही अनियमितता होगी तो शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंच पाएगा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने पर मजबूर होंगे.


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