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घोषणा हुई, पैसे नहीं मिले: एसटी कर्मचारियों की वेतन वृद्धि बनी निगम पर भारी बोझ

– 65 करोड़ महीना देने का ऐलान हवा में? दो महीने से अपने फंड से वेतन दे रही एसटी

– उपमुख्यमंत्री के फैसले की अनदेखी ! एसटी निगम पर बढ़ता जा रहा आर्थिक संकट

नागपुर :- उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा राज्य भर में एसठी निगम के 85 हजार से अधिक कर्मचारियों के वेतन वृद्धि के लिए प्रति माह 65 करोड़ रुपये देने की घोषणा किए हुए दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन निगम को अभी तक सरकार से यह राशि प्राप्त नहीं हुई है. घोषणा को पूरा करने और सरकार की प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए, एसटी निगम पिछले दो महीनों से अपने कोष से कर्मचारियों को वेतन वृद्धि का अंतर भुगतान कर रहा है. महाराष्ट्र एसटी कर्मचारी कांग्रेस के महासचिव श्रीरंग बरगे का दावा है कि इस वजह से निगम गंभीर वित्तीय बोझ का सामना कर रहा है.

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक की उपस्थिति में एसटी के सभी श्रमिक संघों की 13 अक्टूबर, 2०25 को हुई बैठक में यह स्पष्ट रूप से तय किया गया कि राज्य सरकार वेतन वृद्धि में अंतर के लिए प्रति माह 65 करोड़ रुपये का भुगतान करेगी. इस निर्णय के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए वित्त सचिव ओम प्रकाश गुप्ता को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था और वे बैठक में उपस्थित थे. यद्यपि यह निर्णय वित्त विभाग की गोपनीयता में लिया गया था, लेकिन अब तकइसके लागू न होने के कारण वित्त विभाग ने उपमुख्यमंत्री और परिवहन विभाग को पत्र भेजा है.

बरगे ने कहा कि यह स्पष्ट होता जा रहा है कि मंत्री के फैसले की अनदेखी की जा रही है. जब निगम का खजाना पहले से ही तंग है, तब एसटी को वेतन वृद्धि में अंतर की भरपाई के लिए अपने ही फंड का इस्तेमाल करना पड़ रहा है. परिणामस्वरूप, पीएफ, ग्रेच्युटी, बैंकों और अन्य संस्थानों को कर्मचारियों की कटौती का भुगतान करने में कठिनाइयां आ रही हैं.

बरगे ने आगे कहा कि आज की तारीख तक संबंधित संस्थानों और अन्य संस्थानों पर कुल 4,151.49 करोड़ रुपये का बकाया है. वर्तमान में कर्मचारियों के नियमित वेतन पर लगभग 474 करोड़ 84 लाख रुपये प्रति माह खर्च हो रहे हैं. इसमें से वेतन वृद्धि के अंतर पर लगभग 58.3० करोड़ रुपये प्रति माह का अतिरिक्त खर्च हो रहा है. यह बढ़ी हुई राशि पिछले दो महीनों से कर्मचारियों को दी जा रही है. चूंकि वेतन का भुगतान वर्तमान में राज्य सरकार से प्राप्त रियायती मूल्य प्रतिपूर्ति की अपर्याप्त राशि से ही किया जा रहा है, इसलिए निगम को लगातार वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. श्रीरंग बर्गे ने कहा कि एसटी कर्मचारियों और निगम की वित्तीय समस्याएं पहले जैसी ही बनी हुई हैं.


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