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बावनकुले ने आरोपों को किया खारिज, ‘ऑपरेशन लोटस’ की चर्चाए तेज

– वडेट्टीवार ने भाजपा पर लगाया पार्षदों को खरीदने का आरोप

नागपूर :- महाराष्ट्र में 17 सीटों पर होने वाले विधान परिषद चुनाव की घोषणा होते ही सत्ता पक्ष महायुति और विपक्षी महाविकास आघाड़ी के बीच सीट बंटवारे का गणित अभी तक नहीं सुलझा है. इसी बीच पूर्व विदर्भ में बेहद सनसनीखेज राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है. आधिकारिक उम्मीदवारों के नाम तय होने से पहले ही स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के मतदाताओं को लेकर जोड़तोड़ और ‘ऑपरेशन लोटस’ की चर्चाएं तेज हो गई हैं.

कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार के ब्रह्मपुरी विधानसभा क्षेत्र की सिंदेवाही नगर पंचायत के नगराध्यक्ष और कई महत्वपूर्ण नगरसेवकों के फोन अचानक बंद हो गए हैं और वे ‘नॉट रीचेबल’ बताए जा रहे हैं. इतना ही नहीं, चंद्रपुर और गड़चिरोली जिलों के कांग्रेस के 6० से अधिक नगरसेवकों के एक साथ गायब होने की जोरदार चर्चा राजनीतिक गलियारों में शुरू हो गई है. सबसे महत्वपूर्ण सभी पार्षद कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार गुट के माने जाते हैं. इस बात की खूब चर्चा है कि ये सभी जनप्रतिनिधि भाजपा के चिमूर क ेविधायक बंटी भांगडिय़ा के सीधे संपर्क में हैं. कहा जा रहा है कि बीजेपी ने वोटों में बंटवारे से बचने के लिए इन सभी पार्षदों को तुरंत राज्य से बाहर या किसी अनजान जगह पर भेज दिया है.

पूर्व विदर्भ में कथित ‘ऑपरेशन लोटस’ को लेकर कांग्रेस नेता और विधायक विजय वडेट्टीवार ने सोमवार को नागपुर में बड़ा आरोप लगाया है. उन्होंने दावा किया कि नगरसेवकों को 5-5 लाख रुपये देकर उठाने का काम किया जा रहा है. वडेट्टीवार ने कहा कि चुनाव अब लोकतंत्र का पर्व नहीं, बल्कि पैसों का खेल बन चुका है. उन्होंने आरोप लगाया कि 2०14 के बाद से राजनीति में इस तरह की खरीद-फरोख्त की परंपरा शुरू हुई है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के संपर्क में भी भाजपा के 1०० से अधिक नगरसेवक हैं, लेकिन उनकी पार्टी इस तरह की राजनीति में नहीं पड़ती.

उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि अब राजनीति और समाजसेवा धीरे-धीरे बड़े उद्योगपतियों, व्यापारियों और ठेकेदारों के हाथों में जाती दिख रही है. भविष्य में विधानमंडल और विधानसभा में आम लोगों की जगह उद्योगपति और कॉन्ट्रैक्टर नजर आएंगे. समाज और जनता से जुड़े लोगों के लिए राजनीति में जगह कम होती जा रही है. वडेट्टीवार ने दावा किया कि इस चुनाव में एक वोट की कीमत 15 लाख रुपये तक पहुंच गई है. उन्होंने कहा कि 15-15 लाख रुपये देकर अगर वोट खरीदे जाएंगे, तो लोकतंत्र जिंदा रहेगा या नहीं, यह सबसे बड़ा सवाल है. उनके मुताबिक यह पूरी चुनाव प्रक्रिया 1०० करोड़ रुपये के खेल में बदलती जा रही है.

भाजपा ने आरोपों से किया इनकार

कांग्रेस द्वारा लगाए आरोपों को भारतीय जनता पार्टी ने सिरे से खारिज कर दिया. राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने वडेट्टीवार के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि, कांग्रेस का कोई पार्षद हमारे संपर्क में नहीं है. इसी के साथ बावनकुले ने यह भी कहा कि, यह कांग्रेस का आतंरिक मामला है और मुझे इसपर ज्यादा कुछ नही बोलना है. वहीं विधायक परिणय फुके ने कहा कि, हमारे पास पूर्ण बहुमत है, इसलिए हम क्यों किसी के पार्षद को अपने तरफ लाएंगे.


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