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काले धन को सफेद करने वाले नेटवर्क में बड़ा खुलासा

– किसानों के नाम पर खाते खुलवाए

नागपुर :-  एक हजार करोड़ रुपए से अधिक की जीएसटी चोरी, हवाला और काले धन को सफेद करने वाले नेटवर्क में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि गैंग ने हवाला के पैसे को सिस्टम में घुमाने के लिए कृषि उत्पन्न बाजार समिति (एपीएमसी) के जरिए किसानों के नाम पर खाते खुलवाए। इन खातों से करोड़ों रुपए का लेन-देन किया गया। सूत्रों के अनुसार किसानों को जीएसटी और इनकम टैक्स में मिलने वाली छूट और रियायतों का फायदा उठाने के लिए इस सिस्टम का इस्तेमाल किया गया। एपीएमसी के जरिए होने वाले लेन-देन पर कम संदेह होने के कारण इसे हवाला और टैक्स चोरी के लिए सुरक्षित माध्यम बनाया गया। चापा टोल नाके पर ताजुद्दीन डोलानी के खाली ट्रकों को पकड़े जाने के चलते सरकारी विभागों ने पूछताछ करने की खानापूर्ति की, पूरे मामले में ताजुद्दीन डोलानी शहर से बाहर होने का दावा कर रहा है, जबकि बृजकिशोर मनियार और अंशुल मिश्रा फिलहाल अंडरग्राऊंड हो गए है, ताकि एक बार फिर से जीएसटी अधिकारियों के माध्यम से लीपापोती की जा सके।

शुरुआत में ही सामने आए थे ये नाम : खाली ट्रकों को घुमाकर जीएसटी चोरी करने के मामले में शुरुआत से ही बृजकिशोर मनियार, अंशुल मिश्रा और ताजुद्दीन डोलनी के नाम सामने आए थे। सूत्रों का दावा है कि यह केवल फ्रंट चेहरे हैं और इनके पीछे कई बड़े कारोबारी, माफिया और विभागीय अधिकारी जुड़े हुए हैं।

जीएसटी के अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध :सूत्रों के अनुसार इस पूरे घोटाले में जीएसटी विभाग के कई अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। आरोप है कि विभागीय संरक्षण के बिना इतने बड़े स्तर पर फर्जी बिलिंग, हवाला और टैक्स चोरी संभव नहीं थी। पिछले साल नागपुर क्राइम ब्रांच की जांच में भी कुछ अधिकारियों के नाम सामने आए थे, लेकिन कथित दबाव के चलते उन्हें सामने नहीं लाया गया। अधिकारियों को विदेशी ट्रिप और महंगे गिफ्ट जांच से जुड़े सूत्र बताते हैं कि यह गैंग नागपुर में जीएसटी के कई बड़े अधिकारियों को हर माह एक मोटी रकम देने के साथ ही उन्हें विदेशी ट्रिप, आलीशान बंगले, ब्रांडेड कार और भी महंगे गिफ्ट देती रही है। माना जा रहा है कि इसी कारण कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई।

जांच में भी आए थे नाम : वर्ष 2025 में नागपुर क्राइम ब्रांच ने 800 करोड़ रुपए से अधिक की फर्जी बिलिंग, जीएसटी चोरी, हवाला और सट्टे से जुड़े बड़े रैकेट का खुलासा किया था। नियमानुसार इसकी आगे की जांच जीएसटी विभाग को करनी थी, लेकिन मिलीभगत के आरोपों के चलते मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। क्राइम ब्रांच को ही इसे आगे बढ़ाना पड़ा।

कई शहरों में खुले खाते : गैंग ने रायपुर, मुलताई, अमरावती और अन्य शहरों में किसानों के नाम पर बड़े पैमाने पर खाते खुलवाए। इन खातों का इस्तेमाल लोहे के व्यापार में फर्जी बिलिंग और काले धन को सफेद करने के लिए किया गया। पुलिस को इन खातों की सीधी लिंक और लेन-देन के दस्तावेज मिले हैं।


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