– रामटेक में कर्णकर्कश आवाज और नाबालिग चालकों से नागरिक परेशान
रामटेक :- शहर में तेज आवाज करने वाली बुलेट मोटरसाइकिलों का शोर नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बनता जा रहा है। कुछ बुलेट चालकों द्वारा साइलेंसर से पटाखों जैसी तेज आवाज निकालने और तेज रफ्तार से वाहन चलाने के कारण आम नागरिकों, विशेषकर बाजार क्षेत्र के दुकानदारों को असुविधा हो रही है। इस मामले में पुलिस की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं होने पर नागरिकों में नाराजगी बढ़ रही है।
शहर में कुछ नाबालिगों के भी बुलेट सहित अन्य दुपहिया वाहन तेज गति से चलाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इससे न केवल उनकी, बल्कि सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है। सड़कों पर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और आम नागरिकों की आवाजाही रहती है। ऐसे में लापरवाही से वाहन चलाना गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है।
पटाखों जैसी आवाज से ध्वनि प्रदूषण
कुछ बुलेट चालक अपने मनोरंजन के लिए साइलेंसर से पटाखों जैसी तेज आवाज निकालते हैं। इससे बाजार क्षेत्र के दुकानदारों और आसपास रहने वाले नागरिकों को परेशानी होती है। घरों में छोटे बच्चे सो रहे होते हैं, बुजुर्ग आराम कर रहे होते हैं और कई लोग बीमारी के कारण विश्राम कर रहे होते हैं। ऐसे में अचानक होने वाला तेज शोर उनके लिए परेशानी पैदा करता है।
नागरिकों का सवाल है कि आखिर दूसरों को परेशान करके मिलने वाले मनोरंजन का क्या औचित्य है? वाहन चालकों को अपनी पसंद और शौक के साथ दूसरों की सुविधा तथा शांति का भी ध्यान रखना चाहिए।
अभिभावकों की जिम्मेदारी भी अहम
18 वर्ष से कम आयु के बच्चों द्वारा मोटरसाइकिल चलाने के मामलों में अभिभावकों की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण है। माता-पिता को अपने बच्चों को यातायात नियमों, तेज रफ्तार के खतरों और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करना चाहिए। नाबालिगों को नियमों के विरुद्ध वाहन चलाने देने पर संबंधित अभिभावकों के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
पुलिस प्रशासन से कार्रवाई की मांग:
रामटेक के नागरिकों और दुकानदारों की मांग है कि पुलिस प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से ले। तेज आवाज करने वाले साइलेंसरों के इस्तेमाल, यातायात नियमों के उल्लंघन और नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने के मामलों में नियमित जांच कर उचित कार्रवाई की जाए। नागरिकों का सवाल है कि सार्वजनिक शांति और सड़क सुरक्षा को प्रभावित करने वाले ऐसे वाहन चालकों पर पुलिस कब सख्ती करेगी?








