जगन्नाथ मंदिर के कैलेंडर पर बवाल : गलत तस्वीर छपने पर बिक्री पर रोक

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– रत्न सिंहासन की मुद्रा बदली, राज्यभर में आक्रोश के बाद मंदिर प्रशासन ने मांगी माफी

भुवनेश्वर :- ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर के अधिकारियों ने 12वीं शताब्दी के इस मंदिर के रत्न सिंहासन पर देवी-देवताओं के स्थान को गलत तरीके से दिखाने वाली तस्वीर को दर्शाने वाले कैलेंडर की बिक्री पर रोक लगा दी और इसके लिए बुधवार को जनता से माफी मांगी. श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने स्पष्ट किया कि 2026 के कैलेंडर में छपी तस्वीर, ओडिशा राज्य संग्रहालय से प्राप्त ताड़ के पत्तों पर उकेरी गई एक सदी पुरानी कलाकृति की प्रतिलिपि थी. यह उस समय के एक चित्रकार की कृति है और आशा है कि श्रीजगन्नाथ भक्त इसे गलत नहीं समझेंगे. रत्न सिंहासन पर भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ के स्थान को गलत तरीके से दिखाने वाली तस्वीर को लेकर राज्यव्यापी आक्रोश के बीच, मंदिर के मुख्य प्रशासक ने संबंधित अधिकारियों को ‘कैलेंडर की बिक्री पर रोक लगाने और अनजाने में हुई इस गलती के लिए माफी मांगने’ का निर्देश दिया है. बीजद ने कैलेंडर में देवताओं की मुद्रा में हुए बदलाव को ‘बहुत दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया.

बीजद प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने कहा कि चित्रों में भगवान बलभद्र को भगवान जगन्नाथ के स्थान पर दिखाया गया है, जबकि भगवान जगन्नाथ को बलभद्र के स्थान पर दिखाया गया है. इससे देवी सुभद्रा के दाहिनी ओर भगवान जगन्नाथ और बाईं ओर भगवान बलभद्र दिखाई दे रहे हैं, जो परंपरा के विपरीत है. मंदिर प्रशासन द्वारा जारी किए गए कैलेंडर और डायरियों में कथित तौर पर गलत तस्वीर छपी है. एसजेटीए ने कैलेंडर में पुरानी पेंटिंग का उपयोग करने से पहले बुद्धिजीवियों से परामर्श नहीं किया. इस तरह की गलतियां श्री जगन्नाथ संस्कृति और ओडिया अस्मिता के प्रति संवेदनशीलता की कमी को दर्शाती हैं.