– गैस की किल्लत से होटल-रेस्टोरेंट उद्योग बेहाल
– सरकारी सप्लाई ठप, निजी कंपनियों की मनमानी: आसमान छू रही LPG कीमतें
नागपुर :- शहर में पिछले 2 हफ्तों से सरकारी तेल कंपनियों द्वारा कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति लगभग बंद होने के कारण गहरा संकट पैदा हो गया है. इस कमी का फायदा उठाते हुए निजी कंपनियों ने गैस की कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर दी है जिससे शहर के होटल और रेस्टोरेंट उद्योग पर बुरा असर पड़ा है. कई छोटी-मोटी दुकानें बंद हो चुकीं हैं. वहीं कई पर बंदी की तलवार लटक रही है. महंगे गैस सिलेंडर से दुकानदार दुकान चालू रखने में कामयाब तो हैं लेकिन मार्जिन पूरी तरह से खत्म हो गया है.
निजी कंपनियों का पक्ष : कीमतों में इस वृद्धि पर निजी आपूर्तिकर्ताओं का तर्क है कि उनकी खरीद लागत बढ़ गई है. एक कंपनी के अधिकारी के अनुसार 19.5 किलो के सिलेंडर की कीमत 2,700 से बढ़ाकर 3,000 रुपए कर दी गई है. एक अन्य आपूर्तिकर्ता का दावा है कि गैस की कीमत 100 रुपए प्रति किलो से बढ़कर 200 रुपए प्रति किलो हो गई है जिससे 21 किलो के सिलेंडर की कीमत 4,200 रुपए के करीब पहुंच गई है.
जनता और व्यवसाय पर असर : सरकारी कंपनियों से आपूर्ति बाधित होने के कारण कई रेस्टोरेंट मालिकों ने अपने मेनू में कटौती कर दी है. ईंधन के उपयोग को सीमित कर दिया है. खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि करना शुरू कर दिया है.
जहां सरकारी आपूर्ति न के बराबर है वहीं निजी त्रिमूर्तिनगर में सावजी रेस्टोरेंट चलाने वाले वेंडर मनमाने दामों पर गैस बेच रहे हैं. संजू के अनुसार 21 किलो का सिलेंडर पहले 1,800 में मिलता था, अब उसके लिए लगभग 5,000 वसूले जा रहे है. इतनी अधिक कीमत पर व्यापार चलाना नामुमकिन होता जा रहा है.
मुनाफा खत्म, सिर्फ ग्राहकी बचाने की जंग
गैस कंपनियों के साथ-साथ डिलीवरी ब्वॉय ज्याद लूट मचा रहे है. कमाई का मौसम समझकर वे मनमानी पर उतारू है, जबकि प्रशासन खामोशी से सब कुछ होते हुए देख रहा है. वर्धा रोड के एक अन्य होटल व्यवसायी ने बताया कि उन्होंने हाल ही में एक सिलेंडर 5,500 में खरीदा है. उनका कहना है कि दुकान चलाने के लिए कोई और विकल्प न होने के कारण ने उन्हें मजबूरी में ये ऊंचे दाम चुकाने पड़ रहे हैं. दुकान चलाते रहने से ग्राहकी बनी रहती है. उनका कहना है कि मार्जिन पूरी तरह से खत्म हो गया है. केवल ग्राहकी बचाने के लिए वे धंधा कर रहे हैं.



