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नहीं किया जा रहा हैंड ग्लव्स का इस्तेमाल

– फूड स्टॉल बांट रहे बीमारियां

नागपुर :- शहर में ओपन फूड स्टॉलों का क्रेज बढ़ा है. हाथठेलों के अलावा ऑटो, वैन, ट्रक और बस में भी फूड स्टाल चलाए जा रहे हैं. शाम के समय इन स्टॉलों में भारी भीड़ भी देखी जाती है लेकिन इनमें भी नियमों का कहीं पालन नहीं किया जाता. बिना हैंड ग्लोव्ज के ही सामग्री तैयार और सर्व की जाती है. नाखून और अंगुलियों में जमा गंदगी से इन्फेक्शन होने का खतरा बना रहता है. एफडीए ने कहा था कि पानीपुरी विक्रेताओं सहित सभी फूड स्टॉलों चालकों को ग्लोव्ज पहनना अनिवार्य है लेकिन वास्तव में देखा जाए तो शहर में चुनिंदा स्टॉलों में ही विक्रेता ग्लोव्ज पहने नजर आते हैं.

ग्राहकों को खानपान की सुरक्षित सामग्री उपलब्ध कराने की दिशा में नियमों और दिशानिर्देशों की कमी नहीं है लेकिन जहां इनका पालन नहीं किया जाता वहीं सरकारी विभागों की ओर से भी नियमों के पालन हेतु विक्रेताओं पर किसी तरह का दबाव नहीं डाला जाता. फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट के तहत खानपान की सामग्री बेचने वाले होटल, रेस्टोरेंट के लिए दिशानिर्देश जारी किए गए थे. इसके तहत खाद्य सामग्री बनाने और सर्व करने वालों को हाथ में ग्लोव्ज, टोपी, एप्रान पहनना जरूरी किया गया था. ऐसा नहीं होने पर कानून का उल्लंघन माना जाएगा और उन पर दंड लगाया जा सकता है. अन्न एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से इस संदर्भ में कुछ होटल कारोबारियों के साथ कार्यशालाओं का भी आयोजन किया गया लेकिन नियम का पालन हो रहा है या नहीं इस बारे में कोई पहल नहीं की जा रही.

फूड सेफ्टी कानून के तहत प्रत्येक रेस्टोरेंट एवं होटल को लाइसेंस लेना जरूरी है. इतना ही नहीं, उसे सामने प्रदर्शित करना भी जरूरी है. खाद्य पदार्थ किस तेल से बनाया जा रहा है इसकी जानकारी देना भी जरूरी है. आसपास का परिसर पूरी तरह से साफ रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है. इतना ही नहीं, खाना बनाने का स्थान भी पूर्ण रूप से स्वच्छ रखना होगा, कीट एवं चूहों से परिसर मुक्त होना चाहिए, परिसर का पेस्ट कंट्रोल होना भी आवश्यक है. जो कच्चा माल खरीदा जा रहा है वह लाइसेंसधारकों से लेना अनिवार्य है, पानी की टंकी कितने दिनों में साफ कराई गई है इसका रिकॉर्ड रखना भी जरूरी है. शहर के कुछ ही होटल और रेस्टोरेंट द्वारा ही नियमों का पालन किया जा रहा है. कई स्थानों पर तो एक ही खाद्य तेल में कई बार पदाथों को तला जा रहा है. इससे लोगों का स्वास्थ्य गंभीर खतरे में है.

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