– हर साल झेलनी पड़ रही परेशानी; स्थायी समाधान की मांग
नागपुर :- शहर में बनाए गए रेलवे अंडर ब्रिज (आरयूबी) अब नागरिकों के लिए बड़ी समस्या का कारण बनते जा रहे हैं। मामूली बारिश होते ही इन अंडर ब्रिजों में पानी भर जाता है, जिससे यातायात बाधित हो जाता है और राहगीरों तथा वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई स्थानों पर स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि लोगों को जान जोखिम में डालकर पानी से भरे अंडर ब्रिज पार करने पड़ते हैं।
गतवर्ष क्षेत्रीय अधिकारी NHAI, नागपुर को दिए गए निवेदन के बाद पांचपावली क्षेत्र में प्रस्तावित दो आरयूबी को रद्द कर दिया गया। इसके बावजूद शहर के उप्पलवाड़ी, नरेंद्र नगर, गड्डी गोदाम, लोहापुल, मनीष नगर और बिनाकी मंगलवारी जैसे कई इलाकों में बने आरयूबी हर वर्ष बारिश के दौरान जलभराव का केंद्र बन जाते हैं।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, थोड़ी सी बारिश के बाद ही इन अंडर ब्रिजों में घुटनों से लेकर कमर तक पानी भर जाता है, जिससे दोपहिया और चारपहिया वाहन बंद पड़ जाते हैं। कई बार दुर्घटनाओं की स्थिति भी बन जाती है, लेकिन इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया है।

पर्यावरण मित्र जल योद्धा डॉ. प्रवीण डबली ने बताया कि अधिकांश आरयूबी के निर्माण में जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई है और न ही रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया गया है। उन्होंने कहा कि यदि निर्माण के समय ही वैज्ञानिक तरीके से जल प्रबंधन की व्यवस्था की जाती, तो आज यह समस्या उत्पन्न नहीं होती। नरेंद्र नगर क्षेत्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि वहां वर्षों से जलभराव की समस्या बनी हुई है, जबकि पास में नया ओवरब्रिज भी तैयार हो चुका है।
डॉ. डबली ने सुझाव दिया कि सभी अंडर ब्रिजों में सशक्त रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम विकसित किया जाए, जिससे बारिश का पानी जमा होने के बजाय जमीन में समा सके और भूजल स्तर में भी सुधार हो।
कागजों में नियम, जमीन पर नहीं दिखता असर
शहर में वर्षा जल संचयन को लेकर कई नियम बनाए गए हैं, लेकिन उनका पालन प्रभावी ढंग से नहीं हो रहा है। प्रशासन की उदासीनता के चलते सरकारी इमारतों में भी रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम या तो लगाए नहीं गए हैं या फिर वर्षों से अनुपयोगी पड़े हैं।
आंकड़ों के अनुसार, शहर की लगभग7.50 लाख संपत्तियों में से केवल 1,463 (0.92%) में ही वर्षा जल संचयन किया जा रहा है, जो बेहद चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है। वहीं, केवल 0.77% लोगों ने पर्यावरण अनुकूल उपायों को अपनाया है।
नगर निगम द्वारा 5% कर छूट जैसी योजनाएं लागू होने के बावजूद लोगों की भागीदारी अपेक्षाकृत बहुत कम है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि जागरूकता और निगरानी दोनों की कमी है।
भविष्य के लिए चेतावनी
डॉ. डबली ने चेतावनी दी कि शहर में तेजी से हो रहे सीमेंटीकरण के कारण जमीन में पानी का रिसाव लगातार कम हो रहा है। यदि अभी भी प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में जल संकट गंभीर रूप ले सकता है। उन्होंने कहा कि बारिश का अधिकांश पानी सड़कों पर बहकर नालों में चला जाता है, जबकि इसे संरक्षित कर भूजल स्तर बढ़ाया जा सकता है।

सरकारी नियम क्या कहते हैं?
नियमों के अनुसार, नागपुर में मार्च 2005 से सभी इमारतों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य किया गया है। 300 वर्ग मीटर या उससे अधिक के भूखंडों पर इस प्रणाली का होना जरूरी है। बिना वर्षा जल संचयन प्रणाली के भवन निर्माण की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और उल्लंघन करने पर जुर्माने का प्रावधान भी है।
आरयूबी का निर्माण जहां यातायात को सुगम बनाने के उद्देश्य से किया गया था, वहीं उचित जल प्रबंधन के अभाव में यह अब शहरवासियों के लिए बड़ी समस्या बन गया है। यदि समय रहते ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या भविष्य में और विकराल रूप ले सकती है।
प्रशासन से की गई प्रमुख मांगें
डॉ. प्रवीण डबली ने प्रशासन से मांग की है कि—
* सभी आरयूबी में अनिवार्य रूप से वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया जाए
* सरकारी भवनों, स्कूलों, अस्पतालों, पार्कों और विश्वविद्यालयों में इसे लागू किया जाए
* नियमों के पालन के लिए नियमित निरीक्षण किया जाए
* उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाया जाए
* सड़कों के किनारे “रोड वॉटर हार्वेस्टिंग” योजना लागू की जाए
– डॉ. प्रवीण डबली,नर्व स्टीमूलेशन थेरेपिस्ट, योग थेरेपिस्ट,पर्यावरण एवं जल संरक्षण कार्यकर्ता, जल योद्धा नागपुर




