नागपूर ९ : रक्षाबंधन के साथ ही भारत देश उत्सव त्योहार व पारंपरिक पूर्व शुरू हो जाता है। धर्म का अर्थव्यवस्था में बहुत बड़ा योगदान होने के कारण आर्थिक गतिविधियां तेज हो जाती है। ऐसा कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतिया ने बताया ।
बाजारों में राखी की रौनक अपनी चरम सीमा पर देखने मिल रही है। बाजारों में खरीदारी की भारी भीड़ नजर आ रही है। छोटे बड़े आदमी औरत सभी परिवार के साथ बाजार में दिख रहे हैं। कनफेडरेशन का ऑल इंडिया ट्रेडर्स के एक अनुमान के अनुसार बी सी भरतीया ने बताया कि नागपुर में लगभग ₹ 300 करोड़ के व्यापार के साथ देश भर में ₹ 17,000 करोड़ के व्यापार का आकलन है। राखी के साथ साथ फल, मिठाइयां, खिलौनों व उपहार आदि में भी काफी रौनक बनी हुई है। बी सी भरतीया ने कहा कि खुशी की बात यह है कि चीन की राखी या उपहार की वस्तुएं लगभग बाजार से नदारत है। महिलागट व शुक्ष्म व लघु उद्योग का ही माल बाजार में दिख रहा है। भरतीया ने आगे बताया कि इस बार राखी में भाई बहन के प्रेम के साथ राष्ट्र प्रेम, आत्मनिर्भर और भारतीय सामान हमारा स्वाभिमान को ध्यान में रखते हुए देसी माल की ही बिक्री हो रही है। इस बार राखी में भावनात्मक सोच भी नजर आई। ऑपरेशन सिंदूर, डिजिटल राखियां, वोकल फॉर लोकल आदि अनेकों प्रकार की राखियां बाजारों में देखी गई।
अनेक प्रकार की आकर्षक राखियो की बाजार में बड़ी मांग है। इसके साथ ही बाजारों में पारंपरिक राखियों के साथ नवाचार से भरे
थीम बेस्ड राखियों की भी धूम मची हुई है। इसमें इको फ्रेंडली राखियां जो मिट्टी, बीज, खादी, बांस व कपास से बनी है। कस्टमाइज्ड राखियां जो भाई-बहन के फोटो और नाम के साथ बनी है भी खूब बिक रही है। इसके अलावा देश के विभिन्न क्षेत्रों की कला और संस्कृति को समेटे हुए वसुदेव कुटुंबकम थीम पर प्रमुख रूप से बिक रही है। ऐसा कनफेडरेशन आफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष बालकृष्ण भारतीय ने बताया।







