प्रबंधन परिषद की बैठक में अंतिम निर्णय आज

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– विवि के प्रो-वाइस चांसलर पद के लिए तीन दिग्गज स्पर्धा में

नागपुर :- राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के प्रो-वाइस चांसलर की नियुक्ति पर निर्णय आज सोमवार, 23 मार्च को होने वाली प्रबंधन बैठक में लिया जाएगा. यह विषय एजेंडा में शामिल है और जानकारी के अनुसार डॉ. रवि शंकर मोर, डॉ. अखिलेश पेशवेे और डीन डॉ. श्याम कोरेटी के नाम प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं.इस बीच, विश्वविद्यालय शिक्षा मंच भी अपने समूह के कम से कम एक सदस्य को प्रो-वाइस चांसलर नियुक्त करने के लिए प्रयासरत है.

नागपुर विश्वविद्यालय के 1०2 साल के इतिहास में डॉ. मनाली क्षीरसागर पहली महिला ककुलगुरू हैं. कुलगुरु को प्रो-वाइस चांसलर का नाम तय करने का अधिकार है. इसलिए, वे अपने करीबी लोगों में से किसी एक का नाम प्रो-वाइस चांसलर पद के लिए प्रबंधन परिषद के समक्ष रखते हैं. इसे मंजूरी मिल जाती है. प्रबंधन परिषद की बैठक 23 मार्च को होगी.

विश्वविद्यालय शिक्षा मंच का सभी अधिकारियों पर वर्चस्व है. हालांकि, वर्तमान में यह मंच विश्वविद्यालय के महत्वपूर्ण पदों से दूर है. इसलिए, यह ज्ञात है कि वे प्रो-वाइस चांसलर को अपने समूह का सदस्य बनाने के प्रयास कर रहे हैं. मंच ने प्रो-वाइस चांसलर पद के लिए वर्धा के प्रिंसिपल नितिन मठकर, प्रिंसिपल राजेंद्र गंजीवाले, कामठी के पोरवाल कॉलेज के डॉ. तुषार चौधरी, प्रिंसिपल अमीशी अरोरा आदि के नाम प्रस्तावित किए हैं.

डॉ. सुभाष चौधरी की मृत्यु और देरी के बाद, विश्वविद्यालय के तत्कालीन प्रो-वाइस चांसलर दुधे को भी इस्तीफा देना पड़ा. इसके बाद, इस पद का प्रभार डॉ. राजेंद्र काकडे को सौंपा गया. फिर डॉ. कोंडावर ने कुछ दिनों तक इस पद पर कार्य किया, लेकिन वे भी सेवानिवृत्त हो गए. डॉ. क्षीरसागर की कुलगुरु के रूप में नियुक्ति केबाद तीन महीने से अधिक का समय बीत गया, जबकि यह उम्मीद की जा रही थी कि जल्द ही एक नियमित प्रो-वाइस चांसलर और डीन उपलब्ध हो जाएंगे. एक बैठक हो रही है और उसमें प्रो-वाइस चांसलर के चुनाव का मुद्दा एजेंडा में शामिल है. उम्मीद है कि इस बैठक में इस संबंध में कोई निर्णय लिया जाएगा. विश्वविद्यालय के विधि महाविद्यालय के डॉ. मोर, धरमपेठ विज्ञान महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. पेशवे और डीन डॉ. कोरेटी के नामों पर चर्चा चल रही है. इसके अलावा, प्रबंधन परिषद के सदस्य डॉ. भूते के नाम पर भी विचार किया जा रहा है. प्र-कुलगुरू पद के लिए 32 प्रोफेसर इच्छुक हैं. इसलिए, कुलगुरू डॉ. क्षीरसागर के सामने चुनौती यह है कि इनमें से किसे चुना जाए.