Home Latest News तालुका में ६,५०० किसानों को मुफ्त ढेंचा बीज वितरित।

तालुका में ६,५०० किसानों को मुफ्त ढेंचा बीज वितरित।

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◼️ढेंचा की खेती से मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी

◼️धान उत्पादन में भारी वृद्धि; जैविक खेती की ओर अग्रसर होने का इरादा

सचिन चौरसिया,रामटेक :- कृषि विभाग ने धान किसानों को जैविक खेती की ओर प्रेरित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और धान उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से रामटेक तालुका के किसानों को ढेंचा (हरी खाद) के बीज मुफ्त वितरित किए जा रहे हैं। इस पहल के तहत लगभग ६,५०० किसानों को मुफ्त बीजों का लाभ मिलेगा। रामटेक तालुका में लगभग २२ हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की जाती है। मुख्य धान की फसल के अलावा, तालुका में कपास (४ हजार हेक्टेयर), अरहर(तुअर) (२ हजार हेक्टेयर), सोयाबीन (७० से ८० हेक्टेयर) और बड़े पैमाने पर सब्जी और टमाटर का उत्पादन किया जाता है। ढेंचा की खेती धान की फसल की उत्पादकता बढ़ाने और मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार करने में कारगर है। ढेंचा की फसल उगने के बाद, इसे जोतकर मिट्टी में मिला दिया जाता है, जिससे जैविक पदार्थ की मात्रा बढ़ती है, नाइट्रोजन की उपलब्धता में सुधार होता है और मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है। पिछले वर्ष, कई किसानों ने ढेंचा की खेती शुरू की। प्रयोग के फलस्वरूप किसानों ने धान की पैदावार में वृद्धि दर्ज की गई। कृषि विभाग के अधिकारी और कर्मचारी गांवों में जाकर किसानों को धान की खेती के महत्व और विधि के बारे में मार्गदर्शन दे रहे हैं। इस उपक्रम में देवलापार क्षेत्र में सहायक कृषि अधिकारी शाश्वती डोफे, समाधान वानखेड़े, समूह सहायक धनश्री निघोट, कृषि ताई स्नेहा वरठी, कृषि सखी रीमा सलामे और तनुश्री बन्सोड सहयोग कर रहे हैं। इसके अलावा, एटीएमए की उपनिदेशक पल्लवी तलमले, मंडल कृषि अधिकारी रवि राठौड़ और उपकृषि अधिकारी दिनेश उइके ने वितरण केंद्रों का दौरा किया।

जैविक और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू की जा रही इस पहल को तालुका के किसानों से अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है, और कृषि विभाग और सरकार ने आगामी सीजन में धान के उत्पादन में वृद्धि की उम्मीद जताई है।

ग्रिष्मा डेहने,उप-मंडल कृषि अधिकारी, रामटेक

रासायनिक उर्वरकों की कीमतें बढ़ने के बावजूद, वे कृषि के लिए हानिकारक बने हुए हैं। कृषि विभाग और सरकार का ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि किसानों को अपनी भूमि को उपजाऊ बनाए रखने के लिए जैविक उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए। इसीलिए इस वर्ष सरकारी स्तर पर यह प्रयोग किया जा रहा है।

सुनील कोरटे,तालुका कृषि अधिकारी, रामटेक