– ग्राहक की आईडी जांच से लेकर 90 दिन के CCTV रिकॉर्ड तक अनिवार्य
नागपुर :- शहर के ओयो होटल, लॉज, गेस्ट हाउस और होम-स्टे में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने तथा अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए नागपुर पुलिस आयुक्तालय ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मानव तस्करी, देह व्यापार, धोखाधड़ी और अन्य अपराधों की रोकथाम के उद्देश्य से पुलिस आयुक्त विश्वास नांगरे पाटिल ने होटल संचालकों के लिए कई नियम अनिवार्य किए हैं। यह आदेश 9 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। इसके तहत ग्राहकों की पहचान दर्ज करने के साथ ही सीसीटीवी फुटेज कम से कम 90 दिनों तक सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
होटल संचालकों को कमरा देने से पहले ग्राहक के वैध पहचान पत्र की जांच करनी होगी। आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या पासपोर्ट जैसे दस्तावेजों के आधार पर ग्राहक का नाम, पता, मोबाइल नंबर, पहचान पत्र का प्रकार तथा चेक-इन और चेक-आउट का सही समय रजिस्टर या डिजिटल सिस्टम में दर्ज करना होगा। फर्जी दस्तावेज, संदिग्ध गतिविधि या किसी अवैध कृत्य की आशंका होने पर तत्काल स्थानीय पुलिस को सूचना देनी होगी।
24 घंटे चालू रखना होगा सीसीटीवी
होटल के प्रवेश द्वार सहित सभी सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे 24 घंटे चालू रखने होंगे। रिकॉर्डिंग को कम से कम 90 दिनों तक सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। पुलिस द्वारा फुटेज मांगे जाने पर उसे तत्काल उपलब्ध कराना होगा। कैमरे खराब होने की स्थिति में उन्हें बिना देरी दुरुस्त कराना होगा। इसके अलावा होटल में कार्यरत सभी कर्मचारियों के पहचान और निवास सत्यापन संबंधी दस्तावेज भी सुरक्षित रखने होंगे।
…बालिगों के लिए ठहरने पर रोक नहीं
दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि लड़का और लड़की दोनों 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बालिग हैं, तो उनकी आपसी सहमति से होटल में ठहरना अपने आप में गैरकानूनी नहीं है। हालांकि, दोनों की पहचान और उम्र का सत्यापन अनिवार्य रहेगा। नाबालिगों के मामले में संबंधित कानूनों और सुरक्षा प्रावधानों का सख्ती से पालन करना होगा।
गंभीर घटनाओं की तत्काल देनी होगी सूचना
मानव तस्करी या अन्य अवैध गतिविधियों की आशंका के अलावा गंभीर अपराध, विवाद, मारपीट, संदिग्ध मौत या किसी आपात स्थिति की जानकारी मिलते ही होटल प्रबंधन को तत्काल पुलिस को सूचित करना होगा। निर्देशों की अनदेखी करने वाले होटल और गेस्ट हाउस संचालकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।





