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चंद्रपुर में सत्ता का महासंग्राम: कांग्रेस की धमाकेदार वापसी, अपनों के ‘घात’ ने ढहाए भाजपा के किले

– दिग्गज धराशायी, बागियों का जलवा और AIMIM की एंट्री;  

सुशांत घाटे, चंद्रपुर :- चंद्रपुर महानगरपालिका के चुनावी नतीजों ने इस बार केवल आंकड़ों का खेल नहीं दिखाया, बल्कि बड़े-बड़े धुरंधरों के राजनीतिक करियर पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। इस चुनाव में जहाँ कांग्रेस ने २७ सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरकर दमदार वापसी की है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को भीतरघात और जनता की बेरुखी के कारण २३ सीटों पर ही संतोष करना पड़ा। इस बार का चुनाव ‘दिग्गजों की हार’ और ‘नया उदय’ के नाम रहा।

सबसे ज्यादा चर्चा एकौरी प्रभाग की रही, जहाँ AIMIM के अजरुद्दीन शेख ने एक बड़ा उलटफेर करते हुए कांग्रेस के सोहेल शेख और राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट) के दिग्गज उम्मीदवार को करारी शिकस्त दी। अजरुद्दीन की इस जीत ने चंद्रपुर नगर निगम में AIMIM का खाता खोलकर एक नए समीकरण को जन्म दे दिया है।

भाजपा के गढ़ में सेंध: पूर्व महापौर भी नहीं बचा पाईं साख!

सत्ताधारी भाजपा के लिए यह परिणाम किसी झटके से कम नहीं हैं। पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी, लेकिन पूर्व महापौर राखी कांचरलावार और अंजली घोटेकर जैसी दिग्गज महिला नेत्रियों की हार ने संगठन के भीतर मचे घमासान को उजागर कर दिया है। २३ सीटों पर सिमटी भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती उसके अपने कार्यकर्ताओं की नाराजगी रही, जिसका फायदा विरोधियों ने जमकर उठाया।

बागी बने ‘सुल्तान’: नंदू नागरकर की ऐतिहासिक जीत

इस चुनाव की सबसे बड़ी सुर्खियों में से एक नाम नंदू नागरकर का रहा। कांग्रेस से टिकट न मिलने पर निर्दलीय मैदान में उतरे नागरकर ने न केवल चुनाव जीता, बल्कि यह साबित कर दिया कि जमीन पर पकड़ रखने वाले कार्यकर्ता को किसी पार्टी के सिंबल की मोहताज नहीं होती। उनकी जीत ने मुख्यधारा की पार्टियों के टिकट वितरण पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

उबाठा (UBT) का ‘सिक्सर’ और छोटे दलों का बढ़ता कद

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट ने इस चुनाव में अपनी ताकत का लोहा मनवाया है। ६ सीटों पर जीत दर्ज कर उबाठा अब सत्ता की चाबी अपने पास रखने की स्थिति में आ गई है। वहीं भाशेकाप (३ सीटें) और वंचित बहुजन आघाड़ी (२ सीटें) ने भी अपना वजूद बचाए रखा है। शिवसेना (शिंदे गुट), बसपा और AIMIM को १-१ सीट मिली है, जो आने वाले समय में निर्दलीयों के साथ मिलकर किंगमेकर की भूमिका निभा सकते हैं।

फाइनल स्कोर कार्ड: चंद्रपुर महानगरपालिका पार्टी कुल सीटें

कांग्रेस २७

भाजपा २३

शिवसेना (उबाठा) ०६

भाशेकाप ०३

वंचित बहुजन आघाड़ी ०२

निर्दलीय ०२

शिवसेना (शिंदे गट) ०१

बसपा ०१

एआयएमआयएम ०१

राजनीतिक विश्लेषण: आखिर क्यों गिरे ‘बुर्ज’?

नतीजों का विश्लेषण करें तो साफ है कि जनता ने चेहरों की जगह काम और स्थानीय जुड़ाव को प्राथमिकता दी है।

दिग्गजों का ओवरकॉन्फिडेंस: रामू तिवारी और राखी कांचरलावार जैसे नेताओं की हार यह बताती है कि बड़े नाम अब जीत की गारंटी नहीं हैं।

नंदू नागरकर जैसे नेताओं ने यह साबित किया कि कैडर आधारित वोट अब व्यक्तिगत प्रभाव के सामने कमजोर पड़ रहे हैं।

वोटों का बिखराव: एकौरी जैसे प्रभागों में वोटों के ध्रुवीकरण ने AIMIM जैसी पार्टियों के लिए रास्ता साफ किया।

अब आगे क्या?

२७ सीटों वाली कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी तो है, लेकिन बहुमत के लिए उसे उबाठा (६) या अन्य छोटे दलों का समर्थन अनिवार्य होगा। वहीं भाजपा भी हार मानने को तैयार नहीं है और निर्दलीयों व अन्य गुटों के साथ मिलकर ‘ऑपरेशन लोटस’ की संभावनाएं तलाश सकती है।

फिलहाल, चंद्रपुर की जनता ने एक ‘हंग असेंबली’ (त्रिशंकु निगम) देकर गेंद नेताओं के पाले में डाल दी है। देखना दिलचस्प होगा कि चंद्रपुर के ‘महापौर’ की कुर्सी पर कौन विराजमान होता है।

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