– ‘एक पेड़ माँ के नाम’ के बीच जंगलों की कटाई का खेल? जंगलों की लूट या संरक्षण की विफलता? पर्यावरण प्रेमियों ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
नागपुर :- एक ओर देश के प्रधानमंत्री द्वारा “एक पेड़ माँ के नाम” जैसे अभियान चलाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर नागपुर जिले के सावनेर, खापा, ब्राम्हणी (कळमेश्वर), नरखेड़, पारशिवनी तथा मध्य प्रदेश सीमा से जुड़े वन क्षेत्रों में अवैध वृक्ष कटाई और लकड़ी तस्करी के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो यह न केवल वन संपदा की लूट है बल्कि पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ भी बड़ा खिलवाड़ माना जाएगा।
सूत्रों के अनुसार सावनेर, खापा और पाटनसावंगी वन क्षेत्रों में “वर्षों पुराने और बहुमूल्य पेड़ों की कथित रूप से बड़े पैमाने पर कटाई” की जा रही है। स्थानीय सूत्रों और क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि यह पूरा खेल बिना वैध परिवहन परमिट (टीपी) के संचालित हो रहा है। चर्चा यह भी है कि इस कथित अवैध कारोबार में शामिल कुछ ठेकेदारों से हर महीने हजारों रुपये की वसूली की जाती है, जिसके चलते वे बेखौफ होकर जंगलों में कटाई को अंजाम दे रहे हैं।

आरोप है कि जंगलों से काटी गई लकड़ी को रात के अंधेरे में विभिन्न आरा मशीनों, कोयला भट्टों और अन्य इकाइयों तक पहुंचाया जाता है, जहां उसका बड़े पैमाने पर भंडारण और प्रसंस्करण किया जाता है। स्थानीय लोगों का दावा है कि शाम ढलते ही लकड़ी की आवाजाही शुरू हो जाती है और देर रात से लेकर तड़के सुबह तक यह गतिविधियां जारी रहती हैं। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो वन संपदा को पहुंचाए जा रहे भारी नुकसान का खुलासा हो सकता है और कथित रूप से संचालित पूरे नेटवर्क की परतें खुल सकती हैं।
उनका यह भी कहना है कि यदि संबंधित विभागों द्वारा आज ही निष्पक्ष निरीक्षण अथवा छापेमार कार्रवाई की जाए, तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, ऐसी कार्रवाई से यह स्पष्ट हो सकेगा कि “लकड़ी का भंडारण और परिवहन नियमों के अनुरूप हो रहा है या नहीं”, तथा क्षेत्र में चल रही चर्चाओं और आरोपों की सच्चाई क्या है।
सबसे चौंकाने वाली चर्चा सावनेर क्षेत्र को लेकर सामने आ रही है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि यहां एक आरा मशीन संचालक “देव” कथित रूप से विभिन्न लोगों से वसूली कर उसे “बावने” नामक अधिकारी तक पहुंचाने का काम करता है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन क्षेत्र में इसको लेकर व्यापक चर्चा है। यही वजह बताई जा रही है कि कुछ आरा मशीनों में कथित रूप से अवैध कटाई से प्राप्त लकड़ी का भारी मात्रा में भंडारण होने की बातें सामने आ रही हैं। साथ ही क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि “बावने” नामक अधिकारी अपने कार्यक्षेत्र में सप्ताह में दो दिन कथित रूप से अनुपस्थित रहते हैं। हालांकि इस संबंध में भी कोई आधिकारिक जानकारी या पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

सूत्रों का कहना है कि यदि प्रशासन आज ही सावनेर क्षेत्र स्थित संदिग्ध आरा मशीनों पर अचानक छापेमार कार्रवाई करे तो करोड़ों रुपये मूल्य की अवैध लकड़ी बरामद हो सकती है और पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकता है। स्थानीय लोगों का दावा है कि ऐसी कार्रवाई से यह भी सामने आ सकता है कि जंगलों से काटी गई लकड़ी आखिर किन माध्यमों से बाजार तक पहुंच रही है और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।
क्षेत्र में यह आशंका भी व्यक्त की जा रही है कि यदि तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो कथित रूप से जमा लकड़ी को आरा मशीनों में काटकर उसके सबूत समाप्त किए जा सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि रात के समय से लेकर तड़के सुबह तक लकड़ी की कटाई और उसके निस्तारण की गतिविधियां चलने की चर्चाएं लंबे समय से सुनने में आ रही हैं।
पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि एक ओर सरकार करोड़ों पौधे लगाने और हरित क्षेत्र बढ़ाने की बात कर रही है, वहीं यदि जंगलों में खड़े वर्षों पुराने वृक्षों की अवैध कटाई के आरोप सही साबित होते हैं तो यह पूरे पर्यावरण संरक्षण अभियान पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। उनका मानना है कि इस मामले की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति जंगलों और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का दुस्साहस न कर सके।
“अब निगाहें प्रशासन और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे इन गंभीर आरोपों पर क्या कदम उठाते हैं और क्या वन संपदा को कथित रूप से नुकसान पहुंचाने वाले नेटवर्क का पर्दाफाश हो पाता है या नहीं”।








