– पोहरा नदी प्रकल्प के तहत एसटीपी व पंपिंग स्टेशन निर्माण का रास्ता साफ
नागपुर :- नागपुर की महत्वपूर्ण नागरिक सुविधाओं से जुड़े एक मामले में मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने मे. श्री गणेश बिल्डर्स लिमिटेड की याचिका खारिज कर दी है। बिल्डर ने मलनिस्सारण केंद्र (एसटीपी) के लिए आरक्षित 12 हेक्टेयर से अधिक जमीन को आरक्षणमुक्त करने की मांग की थी। न्यायमूर्ति अनिल एस. किलोर और न्यायमूर्ति राज डी. वाकोडे की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि मालिकाना हक में विसंगति वाली खरीद नोटिस वैध नहीं मानी जा सकती। ऐसी नोटिस के आधार पर महाराष्ट्र प्रादेशिक एवं नगर रचना अधिनियम, 1966 (एमआरटीपी एक्ट) की धारा 127 के तहत जमीन का आरक्षण समाप्त होने का दावा नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट के इस फैसले से नागपुर महानगरपालिका के महाराष्ट्र सरकार के निधि से संचालित ‘पोहरा नदी प्रदूषण नियंत्रण प्रकल्प’ के तहत एसटीपी और पंपिंग स्टेशन बनाने का रास्ता साफ हो गया है। याचिकाकर्ता ने मौजा चिखली (खुर्द) स्थित खसरा नंबर 38, 39/2 और 39/3 की जमीन का आरक्षण समाप्त होने का दावा करते हुए जून 2014 में खरीद नोटिस जारी की थी। हालांकि, नोटिस के साथ लगाए गए 7/12 उतारों पर तीन अलग-अलग पक्षों के नाम दर्ज थे। इनमें एक साझेदारी संस्था और दो स्वतंत्र कंपनियां शामिल थीं। मनपा द्वारा नोटिस खारिज किए जाने के बाद याचिकाकर्ता ने करीब 10 वर्षों तक इन त्रुटियों को दूर नहीं किया और न ही इसके खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने इस तथ्य को भी महत्वपूर्ण माना।
दोहरी भूमिका पर कोर्ट की नाराजगी:
न्यायालय ने कहा कि एक ओर आरक्षण समाप्त होने का दावा करना और दूसरी ओर भू-संपादन प्रक्रिया में शामिल होकर मुआवजे की मांग करना, तथा निपटारा होने के बाद अधिक मुआवजे के लिए संदर्भ याचिका दायर करना विरोधाभासी रुख है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि एक ही मामले में एक साथ दो परस्पर विरोधी भूमिकाएं नहीं अपनाई जा सकतीं।
जनहित में जरूरी है प्रकल्प :
हाईकोर्ट ने कहा कि नागपुर शहर की बढ़ती आबादी की जरूरतों को पूरा करने और मौजूदा मलनिस्सारण परियोजनाओं पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए यह प्रकल्प बेहद आवश्यक है। यह व्यापक जनहित से जुड़ा हुआ है। प्रकल्प के लिए मनपा पहले ही भू-संपादन अधिकारी के पास 11.77 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि जमा कर चुकी है। इसके अलावा प्रकल्प का कार्यादेश भी जारी किया जा चुका है।
चार सप्ताह तक ‘जैसे थे’ की स्थिति:
याचिका खारिज करने के साथ ही हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को वरिष्ठ न्यायालय में अपील करने का अवसर देने के लिए उनके वकील के अनुरोध पर अंतरिम ‘जैसे थे’ की स्थिति अगले चार सप्ताह तक बनाए रखने का निर्देश दिया है। चार सप्ताह की अवधि समाप्त होते ही यह अंतरिम आदेश स्वतः समाप्त हो जाएगा।
मनपा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवेंद्र चव्हाण ने पैरवी की। उन्हें मनपा के विधि अधिकारी सूरज पारोचे ने सहयोग किया।





