– निजी कंपनियों को फटकार, मध्य-पूर्व संकट के बीच घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करें
नागपुर :- ईरान इजराइल-अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के कारण न केवल मध्य-पूर्व में संकट खड़ा हो गया है बल्कि कई देशों में पेट्रोल और घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति पर विपरीत असर पड़ने लगा है. इसका अंदाजा इसी से भी लगाया जा सकता है कि अब इस संकट की गूंज हाईकोर्ट में भी सुनाई देने लगी है. गुरुवार को इस संदर्भ में मेसर्स ओमकार सेल्स और अन्य एलपीजी वितरकों की ओर से रिट याचिका दायर की गई जिस पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल किल्लोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने सख्त रवैया अपनाते हुए न केवल निजी कंपनियों को फटकार लगाई बल्कि मध्य-पूर्व संकट के बीच घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने का आदेश भी दिया. याचिकाकर्ता की ओर से अधि. श्याम देवानी और केंद्र सरकार की ओर से अधि. मुग्धा चांदुरकर ने पैरवी की.
अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए रसोई गैस की आपूर्ति को निर्यात प्रतिबद्धताओं से ऊपर रखा जाना चाहिए, मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित पेट्रोलियम कंपनियों से जवाब तलब किया है. याचिकाकर्ताओं की पैरवी कर रहे अधि. श्याम देवानी ने कहा कि वे कॉन्फिडेंस पेट्रोलियम इंडिया लिमिटेड के अधिकृत डीलर है. वितरकों का आरोप है कि वर्तमान में वैश्विक भू और अमेरिका के बीच युद्ध जैसी राजनीतिक तनाव, विशेष रूप से ईरान स्थितियों के कारण तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है जिससे भारत के घरेलू बाजार में गैस की भारी कमी हो गई है.
मुनाफे के लिए घरेलू जरूरतों की अनदेखी का आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रतिवादी कंपनी घरेलू बाजार में कमी के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी हुई कीमतों का फायदा उठाने के लिए गैस का निर्यात कर रही है. याचिकाकर्ताओं के अनुसार, यह सरकार के उन आदेशों का उल्लंघन है जो घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता देने का निर्देश देते हैं. डीलरों ने दलील दी कि गैस की कमी के कारण आम जनता को भारी कठिनाई हो रही है और उन्हें खाना पकाने के लिए असुरक्षित विकल्पों का सहारा लेना पड़ रहा है जो जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) का उल्लंघन है.
सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 5 मार्च और 9 मार्च 2026 को विशेष आदेश जारी कर सभी तेल कंपनियों को घरेलू आपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे. अदालत ने इस मुद्दे को अत्यत महत्वपूर्ण और गंभीर मानते हुए प्रतिवादी को आदेश दिया कि एलपीजी का भंडारण और वितरण वर्तमान सरकारी नीति और दिशानिर्देशों के अनुसार ही किया जाना चाहिए.
रसोई गैस अत्यावश्यक वस्तु
अदालत ने कहा कि रसोई गैस एक आवश्यक वस्तु है और इसकी निर्वाध आपूर्ति सुनिश्चित करना सार्वजनिक हित में अनिवार्य है, कोर्ट ने केंद्र सरकार और डायरेक्टर जनरल आफ फारेन ट्रेड को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. इसके साथ ही अदालत ने अन्य समान लंबित मामलों को भी इस याचिका के साथ जोड़ने पर विचार करने की बात कही है. मामले की अगली सुनवाई तक मौजूदा नीतियों का सख्ती से पालन करने की हिदायत दी गई है.