– राख से उठते प्रदूषण पर जनहित याचिका, कोर्ट ने पावर स्टेशन के दावों पर उठाए सवाल
– याचिकाकर्ता के आपराधिक रिकॉर्ड का खुलासा, फिर भी कोर्ट ने पर्यावरण मुद्दे को माना अहम
नागपुर :- कोराडी ताप बिजली घर और खापरखेड़ा ताप बिजली घर से उठने वाली राख के कारण होते प्रदूषण को लेकर राजेश उर्फ धम्मेश चौहान की ओर से हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई. याचिका पर गुरुवार को सुनवाई के दौरान बिजली घर की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने पावर स्टेशन के पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त होने का दावा किया. उसके बाद न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश वाकोडे ने विभाग से शपथपत्र दायर करने के आदेश दिए. याचिकाकर्ता द्वारा प्रदूषण मुक्त पर्यावरण के संबंध में उठाए गए मुद्दे पर पावर स्टेशन की ओर से अपना पक्ष रखा गया. प्रतिवादी ने स्पष्ट किया कि जहां तक इस पावर स्टेशन का सवाल है, इससे कोई प्रदूषण नहीं फैल रहा है. उन्होंने अदालत को बताया कि जब याचिकाकर्ता ने पहले नोटिस दिया था, तब उन्होंने अपने जवाब में सभी प्रक्रियाओं और कार्यप्रणाली का विस्तृत विवरण दे दिया था. प्रतिवादी ने यह भी आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता बिना किसी ठोस आधार के हर 6 महीने में इसी तरह का नोटिस भेजता रहता है.
सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष पावर स्टेशन की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने अदालत के सामने यह स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में यह झूठा दावा किया था कि उस पर कोई भी आपराधिक मामला लंबित नहीं है. है. अदालत में यह तथ्य सामने लाया गया कि याचिकाकर्ता का यह बयान तथ्यात्मक रूप से गलत है क्योंकि वह वास्तव में पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले में जमानत पर बाहर है. इस पर अदालत का मानना था कि यदि किसी व्यक्ति पर आरोप हो, तो क्या वह प्रदूषण रहित वातावरण की मांग नहीं कर सकता है. इसके बाद हाई कोर्ट ने हलफनामा देने का आदेश देते हुए सुनवाई स्थगित कर दी. इस मामले में अदालत से 1 जून तक का समय देने का अनुरोध किया गया. देरी का कारण बताते हुए उन्होंने जानकारी दी कि उनके विधि अधिकारी पिछले 10 दिनों से अस्पताल में भर्ती थे और सुनवाई से मात्र 2 दिन पहले ही उन्हें वहां से छुट्टी मिली है. बहस के दौरान 15 फरवरी को जारी किए गए एक नोटिस का भी जिक्र किया गया.
नागपुर में प्रदूषण के बड़े स्रोत थर्मल पावर प्लांट
अदालत ने महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नीरी और आईआईटी बॉम्बे द्वारा 8 जुलाई 2024 को प्रस्तुत की गई एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट का हवाला दिया. नागपुर, अमरावती और चंद्रपुर सहित राज्य के 10 शहरों में वायु गुणवत्ता और उत्सर्जन के स्रोतों पर किए गए इस अध्ययन में यह स्पष्ट रूप से पाया गया है कि सर्वाधिक उत्सर्जन भार कोराडी और खापरखेडा जैसे थर्मल पावर प्लांटों से ही उत्पन्न होता है. विशेषतः सिटी के वायु प्रदूषण को लेकर इसके पूर्व छपी खबरों पर हाई कोर्ट की ओर से स्वयं संज्ञान लिया गया था. स्वयं संज्ञान वाली याचिका को इस जनहित याचिका के साथ जोड़ने के आदेश भी कोर्ट ने दिए.

