नई दिल्ली :- उत्तर भारत इस समय असली ठंड की मार झेल रहा है। गुरुग्राम में तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है और जनवरी की यह भीषण ठंड लोगों को मज़ा तो देती है, लेकिन इसके साथ ही गंभीर स्वास्थ्य खतरों का भी संदेश लेकर आती है। खासकर हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों के लिए यह मौसम बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
नई दिल्ली के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. राजीव नारंग के अनुसार सर्दियों में शरीर की रक्त वाहिकाएँ सिकुड़ जाती हैं, जिसे चिकित्सकीय भाषा में वासोकंस्ट्रिक्शन कहते हैं। इस सिकुड़न के कारण रक्त प्रवाह बाधित होता है और ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ सकता है। यही कारण है कि सर्दियों में हार्ट अटैक और स्ट्रोक के मामलों में इजाफा देखा जाता है। कई बार मरीज ऐसे आते हैं जिनका ब्लड प्रेशर पहले पूरी तरह नियंत्रित रहता था, लेकिन ठंड पड़ते ही उनकी रीडिंग अचानक खतरनाक स्तर तक पहुंच जाती है। इसका असर चलते-चलते सांस फूलना, वॉक में कठिनाई, सीने में भारीपन या एंजाइना जैसी समस्याओं के रूप में दिखाई देता है। चेतावनी देते हैं कि सर्दियों में दवा लेने के बावजूद ब्लड प्रेशर नियंत्रित न रहना आम समस्या है। इसलिए इस मौसम में केवल दवा पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं है; अतिरिक्त सावधानी और नियमित देखभाल जरूरी है।



