– फडणवीस का सवाल- ढाई साल बाद ही क्यों सामने आई बातचीत?
नागपुर :- मनोज जरांगे पाटिल द्वारा 500 करोड़ रुपये के कथित लेनदेन से संबंधित ऑडियो क्लिप सुनाए जाने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मच गई है। इस मामले पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पहली प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऑडियो क्लिप की सत्यता की जांच कराई जाएगी। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि करीब ढाई साल पुरानी बताई जा रही बातचीत अब सामने लाने के पीछे आखिर क्या उद्देश्य है?
नागपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान फडणवीस ने कहा कि ऑडियो क्लिप की प्रामाणिकता का पता लगाने के लिए गहन जांच की जाएगी। उनके अनुसार, मनोज जरांगे के साथ शिवसेना के प्रतिनिधिमंडल और भाजपा ने भी इस मामले की जांच की मांग की है। उन्होंने बताया कि विशेष जांच दल (एसआईटी), साइबर सेल और फॉरेंसिक प्रयोगशाला की मदद से मामले की पड़ताल कर सच्चाई सामने लाने का प्रयास किया जाएगा। इस बीच, पूर्व सांसद राहुल शेवाले ने इस मामले के पीछे राजनीतिक साजिश होने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि महायुति के नेताओं के बीच मतभेद पैदा करने और मुख्यमंत्री तथा उपमुख्यमंत्रियों की छवि खराब करने के उद्देश्य से यह मामला सामने लाया गया है।
संजय राऊत ने पूछा-500 करोड़ रुपये कहां गए?
शिवसेना (उद्धव बालासाहब ठाकरे) के सांसद संजय राऊत ने इस मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि यदि भाजपा नेता 500 करोड़ रुपये दिए जाने की बात कर रहे हैं, तो यह रकम आखिर कहां गई? एसआईटी गठित करने की घोषणा पर भी उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि केवल जांच समितियां बनाने से क्या हासिल होगा। उन्होंने जांच की निष्पक्षता को लेकर भी संदेह जताया।
एक ओर मुख्यमंत्री फडणवीस ने फॉरेंसिक जांच के जरिए सच्चाई सामने लाने का आश्वासन दिया है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। अब इस कथित ऑडियो क्लिप की प्रामाणिकता और ढाई साल बाद इसके सामने आने के कारणों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।








